काशगर। चीन के अशांत शिनजियांग प्रांत में मुस्लिम महिलाओं को बुर्का पहनने की वजह से हिरासत केंद्र में रखा जा रहा है। 28 साल की अस्कु इलाके की मेहरबां शिमिह इसी वजह से वेंसू काउंटी के हिरासत केंद्र में रखा गया है।

स्थानीय प्रशासन को उनके कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होने की आशंका थी। मेहरबां का कहना है कि केंद्र में उनके अलावा 11 महिलाओं समेत 275 लोग रखे गए हैं। इनमें से कई को बुर्का पहनने या अवैध इस्लामिक वीडियो देखने की वजह से वहां लाया गया। शिनजियांग में बुर्का पहनना और अवैध इस्लामिक वीडियो देखना गुनाह माना जाता है। ऐसा करने वाले उइगरों को सूबे के हिरासती केंद्रों में डाल दिया जाता है।

चीन की कम्युनिस्ट सरकार इन हिरासत केंद्रों को प्रशिक्षण केंद्र बताती है, जहां कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित उइगरों को प्रशिक्षित किया जाता है। लेकिन मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक इन हिरासत केंद्रों में हजारों उइगरों को जबरन कैद किया गया है।

चीन के पश्चिमी प्रांत शिनजियांग की सीमा भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से लगती है। इस राज्य में उइगर मुस्लिमों की बहुलता है। प्रांत में मौजूद हिरासती केंद्रों की कुल संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन एक अधिकारी के अनुसार, प्रांत की प्रत्येक काउंटी में एक केंद्र है। कई केंद्रों को अब बंद कर दिया गया है।

मेहरबां का कहना हैं कि उनकी सास ने उन्हें बुर्का पहनने को मजबूर किया था। किसी पड़ोसी ने स्थानीय पुलिस को इस बात की जानकारी दे दी, जिसके बाद उसको केंद्र ले जाया गया। लोगों को भड़काने के लिए मेहरबां की सास और पति को 17 साल जेल की सजा दे दी गई है। 28 साल के इल्कत तार्सुन इस्लाम से जुड़े वीडियो देखने के लिए साइबर पुलिस के रडार पर आ गए थे। वह 2018 से सेंटर में हैं। तार्सुन ने कहा, 'मुझे कोर्ट में जाकर सजा कुबूल करने या ट्रेनिंग सेंटर आने का विकल्प दिया था। मैंने सेंटर जाना चुना।'