इस्लामाबाद। पाकिस्तान में कट्टरपंथियों द्वारा छेड़े गए आंदोलन में छह लोगों की मौत हो गई है जबकि 200 से ज्यादा घायल हैं।

चुनाव प्रक्रिया में शपथ से पैगंबर मुहम्मद का जिक्र हटाए जाने से भड़के आंदोलनकारियों का विरोध राजधानी इस्लामाबाद के अतिरिक्त कराची, लाहौर और रावलपिंडी समेत कई शहरों में पहुंच गया है।

हालात को काबू करने के लिए सरकार ने संवेदनशील स्थान पर सेना तैनात की है। आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने अर्धसैनिक बल रेंजर्स और फ्रंटियर कांस्टेबुलरी की मदद से अभियान छेड़ा हुआ है।

सुरक्षा बलों के निशाने पर तहरीक-ए-खतम-ए-नबुव्वत, तहरीक-ए-लब्बैक या रसूल अल्लाह और सुन्नी तहरीक पाकिस्तान संगठन हैं। ये संगठन इस्लामाबाद का एक प्रमुख हाईवे पिछले तीन हफ्ते से रोके हुए हैं।

शनिवार को हाईवे पर से धरना खत्म कराने के लिए बल प्रयोग किया और आंसू गैस व रबर बुलेट दागीं। लेकिन जब हालात बेकाबू हुए तो सुरक्षा बलों को पीछे हटना पड़ा।

यहां पर आंदोलनकारियों और सुरक्षा बलों की हिसक झड़प में छह लोग मारे गए हैं और 200 से ज्यादा घायल हुए हैं। घायलों में 95 सुरक्षा बलों के जवान हैं। कराची में 35 लोगों के घायल होने की खबर है।

सेना ने हालात पर जताई चिंता

गृह मंत्री एहसन इकबाल ने हालात की गंभीरता को देखते हुए शनिवार रात इस्लामाबाद में सेना की तैनाती के आदेश दिए। हालात पर प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने चर्चा की है। सेना ने हालात इस कदर बिगड़ने पर चिंता जाहिर की है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए जनरल बाजवा संयुक्त अरब अमीरात का अपना दौरा बीच में ही खत्म करके शनिवार रात पाकिस्तान लौट आए हैं।

देश के सभी न्यूज चैनलों का प्रसारण रोक दिया गया है और सोशल मीडिया साइट्स को ब्लॉक कर दिया गया है।

पाकिस्तान ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर इस तरह की कार्रवाई की निंदा की है। राजधानी इस्लामाबाद और पंजाब प्रांत के सभी स्कूल-कॉलेज दो दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। आंदोलनकारी

कानून मंत्री को हटाने पर अड़े

आंदोलनकारी चुनावों में उम्मीदवारों द्वारा दिए जाने वाले हलफनामे से पैगंबर मुहम्मद का जिक्र हटाए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पैगंबर सर्वोच्च हैं।

इसलिए परंपरा में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। आंदोलनकारी मामले को ईश निंदा से जोड़कर देख रहे हैं। आंदोलनकारी कानून में बदलाव के लिए देश के कानून मंत्री जाहिद हामिद को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और उन्हें हटाए जाने की मांग कर रहे हैं।

सरकार ने कानून बदलकर हलफनामे की पूर्व स्थिति बहाल कर दी लेकिन आंदोलनकारी कानून मंत्री को हटाने की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कानून मंत्री के सियालकोट स्थित आवास पर भी हमला हुआ है।

सख्ती से हालात बिगड़ने की आशंका

शनिवार देर रात गृह मंत्री एहसन इकबाल की अध्यक्षता में हुई अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हुई। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने सरकार को चेताया है कि आंदोलन को कुचलने की कोशिश की गई तो बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है। विपक्षी तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

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