संयुक्त राष्ट्र। पाकिस्तान की कोशिश थी कि चीन की मदद से संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दा हाईलाइट किया जाए, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। चीन के अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में किसी देश ने साथ नहीं दिया। इस तरह एक बार फिर भारत की विदेश नीति भारी पड़ी।

यह पहली बार नहीं है जब दुनिया की इस सबसे बड़ी पंचायत में पाकिस्तान ने भारत को घेरने की कोशिश की और औंधे मुंह गिर पड़ा। 1971 में भी ऐसी ही कुछ हुआ था। तब भारत हर मोर्चे पर पाकिस्तान पर भारी पड़ रहा था। पाकिस्तान को लगने लगा था कि उसका एक हिस्सा टूटकर बांग्लादेश बन जाएगा।

तब पाकिस्तान के विदेश मंत्री थे जुल्फिकार अली भुट्टो। जुल्फिकार अली इस विवाद को यूएन में ले गए। बांग्लादेश के साथ ही उन्होंने कश्मीर का मुद्दा भी उठाया और भारत को घेरने के कोशिश की, लेकिन किसी देश ने साथ नहीं दिया। खुद को अलग-थलग पड़ता देख पाकिस्तान बौखला गया।

15 दिसंबर 1971 को जुल्फिकार अली भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में अपना पक्ष रखा और आरोप लगाया कि पाकिस्तान के साथ पक्षपात हो रहा है। वे गुस्सा से तिलमिला गए और प्रस्ताव के पन्ने ही फाड़ दिए और अपनी टीम के साथ उठकर चल गए।