बीजिंग। कोरोना वायरस को लेकर लगातार चीन कटघरे में खड़ा हो रहा है। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह चीनी वायरस है और इसके बाद अमेरिका के एक वकील ने इस वायरस को बनाने और फैलाने का चीन पर आरोप लगाते हुए उस पर 20 ट्रिलियन डॉलर का मुकदमा दर्ज कराया था। इस बीच चीन ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उसने न तो कोरोनावायरस बनाया है और न ही जानबूझकर इसे प्रसारित किया है। लिहाजा, इस वायरस के लिए "चीनी वायरस" या "वुहान वायरस" जैसे शब्दों का उपयोग करना गलत है।

भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने बुधवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को 'चीनी लोगों को ढांढस बंधाने' की बजाय महामारी पर चीन की 'त्वरित प्रतिक्रिया' पर ध्यान देना चाहिए। इस बीमारी से लड़ने के प्रयासों में भारत और चीन के बीच सहयोग पर विस्तार करते हुए रोंग ने कहा कि दोनों देशों ने संचार बनाए रखा है और कठिन समय के दौरान महामारी का मुकाबला करने में एक-दूसरे का समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष ने चीन को चिकित्सा आपूर्ति प्रदान की है और विभिन्न तरीकों से संघर्ष के खिलाफ अपनी लड़ाई का समर्थन किया है। हम सराहना करते हैं और उसके लिए भारत को धन्यवाद देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जोर देकर कहा कि चीन और वुहान को वायरस से जोड़ना सही होगा, इस बात का हवाला देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि जो लोग चीन के प्रयासों को कलंकित करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्होंने चीनी लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा में किए गए भारी बलिदानों की अनदेखी की है।

यद्यपि चीन में वुहान शहर ने सबसे पहले प्रकोप की सूचना दी थी, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि चीन ही वायरस का स्रोत है, जो ​​COVID-19 का कारण बना। रोंग ने कहा कि कोरोनावायरस की उत्पत्ति विज्ञान का विषय है, जिसका पेशेवर और वैज्ञानिक मूल्यांकन की जरूरत है। उन्होंने फिर दोहराया कि चीन ने न तो इस वायरस को बनाया है और न ही जानबूझकर इसे प्रसारित किया है। इसे तथाकथित 'चीनी वायरस' कहना पूरी तरह से गलत है।

इस महीने की शुरुआत में चीन ने COVID -19 को 'वुहान वायरस' के रूप में प्रचारित करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की निंदा की थी। उन्होंने पोम्पियो की टिप्पणियों को "नीच व्यवहार" और देश को कलंकित करने का प्रयास करार दिया था।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai