नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि गोनोरिया नाम की बीमारी एक बार फिर से वापस लौट आई है। एक दशक पहले यौन संक्रमित यह बीमारी खत्म हो गई थी, लेकिन फिर से और ज्यादा खतरनाक स्वरूप में लौटी है।

इस बीमारी में इस बार एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी क्षमता है और ऐसे में इसका इलाज करना असंभव हो रहा है। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने विश्वभर में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी गोनोरिया के पैटर्न पर नजर रखने वाले एक शोध पत्र का हवाला दिया है।

इसमें कहा गया है कि कई देशों में इस बीमारी में काम आने वाली पुरानी और सस्ती एंटीबायोटिक दवाएं बे-असर हो रही हैं। कुछ उच्च-आय वाले देशों में इस संक्रामक बीमारी की अच्छी निगरानी कर गोनोरिया के मामले देखे हैं, जिनका सभी ज्ञात एंटीबायोटिक दवाओं से इलाज नहीं हो पा रहा है।

डब्ल्यूएचओ के ह्यूमन रीप्रोडक्शन डिवीजन में मेडिकल ऑफिसर टेओडोरा वाई ने कहा कि जिस बैक्टीरिया के कारण गोनोरिया होती है वह विशेष रूप से स्मार्ट है। हर बार हम एंटीबायोटिक दवाओं के एक नए क्लास का इस्तेमाल करते हैं और हर बार वह उसका प्रतिरोध करने लगता है।

उन्होंने कहा कि दस्तावेजीकृत मामलों से पता चलता है कि कम आय वाले देशों में गोनोरिया सामान्य बीमारी है, जिसके बारे में पता भी नहीं लगता है। डब्लूएचओ का अनुमान है कि लगभग 7.8 करोड़ लोग हर साल गोनोरिया से संक्रमित होते हैं।

इससे महिलाओं के जननांगों, मलाशय या गले में संक्रमण होते हैं, जो समस्या को गंभीर बना देते हैं। पेल्विक इनफ्लेमेट्री डिसीज, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी और बांझपन सहित कई जटिलताएं हो सकती हैं।

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