वाशिंगटन । पुलिस हिरासत में अश्वेत की मौत को लेकर अमेरिका में भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। हिंसक प्रदर्शनों से फैली आग अमेरिका के 140 शहरों तक पहुंच गई है। छह प्रांतों और 13 प्रमुख शहरों में इसके चलते आपातकाल की घोषणा की गई है। पूरे देश में 65 हजार से ज्यादा नेशनल गार्ड को तैनात किया गया है। वाशिंगटन डीसी के पास स्थित 200 साल पुराने एक चर्च सहित प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल और कई अन्य राष्ट्रीय स्मारकों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। इससे नाराज होकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना उतारने की धमकी दी है। हालांकि उनकी धमकी का प्रदर्शनकारियों पर कोई असर नहीं हुआ और विभिन्न शहरों में की गई फायरिंग से पांच पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। हॉलीवुड और प्रमुख चर्चित हस्तियों ने नस्लवाद की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र ने भी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। इस हिंसा को पिछले कई दशकों में सबसे खराब नागरिक अशांति माना जा रहा है।

सोमवार को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन से राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि प्रदर्शनकारी जो कुछ कर रहे हैं वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं है। बल्कि यह एक तरह का "डोमेस्टिक टेरर" है। निर्दोष लोगों की जान लेना न केवल मानवता के खिलाफ अपराध है बल्कि यह भगवान के खिलाफ भी अपराध है। उन्होंने कहा कि बर्बादी, आगजनी, दंगों और लूट को रोकने के लिए और अमेरिकियों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए सभी उपलब्ध सरकारी संसाधनों और सेना को जुटा लिया गया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि फ्लॉयड की बर्बर मौत से सभी अमेरिकी काफी दुखी हैं और इसका विरोध कर रहे हैं उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में न्याय होगा।

ट्रंप ने सभी गवर्नर को नेशनल गार्ड को पर्याप्त संख्या में तैनात करने की सिफारिश की जो सड़कों पर हो रही हिंसा को नियंत्रित करें। उन्होंने कहा कि हम हर किसी को चेतावनी दे रहे हैं कि सात बजे के कर्फ्यू को सख्ती से लागू किया जाएगा। जो लोग निर्दोष लोगों पर अत्याचार कर रहे हैं और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा, हिरासत में लिया जाएगा और कानूनी कार्रवाई करते हुए उन पर मुकदमा भी चलाया जाएगा। अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा, "राष्ट्रपति के तौर पर मेरा पहला और सर्वोच्च कर्तव्य हमारे महान देश और अमेरिकी लोगों की सुरक्षा और बचाव करना है।" उन्होंने कहा कि जब मैंने देश के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी तो मैंने इसी बात की शपथ ली थी।

हिंसा के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के पास स्थित 200 साल पुराने सेंट जोंस एपिस्कोपल चर्च का भी दौरा किया। यह वही चर्च है, जहां पर पुलिस से झड़प के बाद प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी थी। डेलामाइक्रोसॉफ्ट के भारतीय मूल के सीईओ सत्या नडेला ने भी अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, "समाज में घृणा और नस्ली भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। सहानुभूति रखना और एक साझा समझ एक शुरुआत है, लेकिन हमको फिलहाल बहुत कुछ करने की जरूरत है।

हिंसा रोक पाने में अधिकारियों की विफलता के बाद राजधानी वाशिंगटन और न्यूयॉर्क सिटी में सोमवार देर रात फिर कर्फ्यू लगा दिया गया। 28 मई से शुरू हुई हिंसा में सिर्फ न्यूयॉर्क शहर में 40 से अधिक पुलिस अधिकारी जख्मी हुए हैं। जबकि एक हजार प्रदर्शनकारियों को अब तक हिरासत में लिया गया है। कर्फ्यू के दौरान गोली चलाने वाले लुइसविले के पुलिस प्रमुख को बर्खास्त कर दिया गया। मेयर ने यह कार्रवाई उस वक्त की, जब उन्हें पता चला कि गोलीबारी में शामिल अधिकारी हिंसा के दौरान बॉडी कैमरा चालू करने में विफल रहे। इस गोलीबारी में एक प्रसिद्ध बार्बेक्यू स्थल के मालिक की मौत हो गई थी।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के विरोध में भड़की हिंसा की निंदा की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपनी समस्याओं के राजनीतिक समाधान का आह्वान किया है। उन्होंने कहा लेकिन इसके बावजूद हमें हिंसा का सहारा लेने वालों की निंदा करनी चाहिए। हिंसा से चिंतित संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का निवेदन किया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की बातों को सुना जाना चाहिए और पुलिस को भी संयम रखना चाहिए। हांगकांग की नेता कैरी लॉम ने मंगलवार को अमेरिका के दोहरे मानकों की निंदा की। उनका इशारा अमेरिका में हो रहे प्रदर्शनों की ओर था। उन्होंने कहा कि जब पिछले साल इसी तरह की हिंसा हांगकांग में हुई थी, उनका रवैया बिल्कुल अलग था, लेकिन अब उनके देश में हो रही हिंसा पर उनका रवैया पूरी तरह अलग है।

Posted By: Yogendra Sharma

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