नई दिल्ली। भीषण खाद्यान्न संकट और मंहगाई से जूझ रहा पाकिस्तान अब टिड्डियों के हमले से परेशान हुआ जा रहा है और इस समस्या से निजात पाने के लिए भारत से उम्मीद लगाए बैठा है। पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 और 35ए खत्म किए जाने के बाद भारत से सभी कूटनीतिक और कारोबारी संबंध खत्म करने वाले पाकिस्तान ने टिड्डियों की समस्या से निपटने के लिए भारत से सहयोग मांगा है। भारत ने भी मुसीबत में फंसे पाक को निराश नहीं किया है। टिड्डियों से निपटने की रणनीति तय करने के लिए दोनों देशों के बीच अभी तक पांच दौर की बातचीत हो चुकी है।

पिछले साल भी पाकिस्तान में टिड्डियों ने रबी फसलों पर 20 साल बाद सबसे भयानक हमला किया था। इस हमले में हजारों एकड़ की फसल बर्बाद हो गई थी। पाकिस्तान में फसलें चौपट करने के बाद टिड्डियों ने सीमा पार कर भारत में भी प्रवेश कर लिया था। लेकिन अत्याधुनिक तकनीक और जमीनी स्तर पर विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की वजह से भारत टिड्डियों को सीमावर्ती जिलों में ही रोकने में सफल रहा था। यदि समय रहते टिड्डियों को नहीं रोका जाता, तो वे बांग्लादेश तक सारी फसलों को साफ कर जातीं। टिड्डियों के प्रकोप से पाकिस्तान पर दोहरी मार पड़ी है क्योंकि वह पहले से ही खाद्यान्न संकट से जूझ रहा है। टिड्डियों के आक्रमण के बाद रबी की फसलें बर्बाद होने से पाकिस्तान के हालात बेकाबू हो गए हैं। टिड्डियों की समस्या को लेकर पाकिस्तान को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करना पड़ा है।

गेहूं की भारी कमी और उसकी बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए पाकिस्तान को बड़ी मात्रा में उसका आयात करना पड़ रहा है। इसके बावजूद समस्या से छूटकारा मिलता नजर नहीं आ रहा है। वैज्ञानिकों के इस साल जून में पिछले साल से भी कहीं बड़े टिड्डियों के हमले की आशंका जताई है, जिससे निपटने में पाकिस्तान खुद को असहाय पा रहा है। वहीं भारत इस साल और बेहतर तैयारियों के साथ इनके मुकाबले की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कई आधुनिक उपकरण, जरूरी दवाएं, गाड़ियों और 60 अतिरिक्त स्प्रेयर खरीदे जा रहे हैं। टिड्डियों पर दवाओं के हवाई छिड़काव की क्षमता को बढ़ाने के लिए गृह, रक्षा, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ समन्वय का काम शुरू हो चुका है।

Posted By: Yogendra Sharma