जमीन का जो हिस्सा सदियों से भारतभूमि का अभिन्न और गौरवशाली अंग था, उसे 1947 में भारत विभाजन के समय धर्म के आधार पर बांट दिया गया था। जो हिस्सा अलग हुआ, उसका नाम हुआ Pakistan, किंतु धर्म को आधार बनाकर अलग हुए इस देश में बाद में अन्य धर्मों के पूजा-उपासना स्थलों के साथ जो क्रूरता बरती गई, उनकी जो दुर्गति की गई, वह इतिहास में काले अक्षरों में कैद है। पाक बनने के बाद वहां सरकार के समर्थन से मंदिरों, गुरुद्वारों को कसाईबाड़ों और मांस बेचने वाली होटलों में बदल दिया गया था। इस बात का जिक्र बंटवारे के समय पाकिस्तान गए और बाद में वहां सेभागकर फिर भारत आए जोगेंद्रनाथ मंडल ने एक पत्र में किया था।

विभाजन के समय बाबासाहब आंबेडकर के मना करने के बाद भी जोगेंद्रनाथ मंडल मुस्लिम लीग का साथ देते हुए पाकिस्तान जा बसे थे। वहां वे प्रथम कानून मंत्री बने। किंतु कुछ ही वर्षों में वहां मुस्लिमों द्वारा दलितों और उनके साथ किए जाने वाले दुर्व्यवहार, धार्मिक हिंसा से वे इतने परेशान हुए कि भारत लौट आए।

उन्होंने Pakistan का कानून मंत्री रहते हुए पाक के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखा था- 'पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हालात बहुत खराब हैं? मुझे मुसलमानों द्वारा हिंदुओं, बंगालियों व सिखों की बच्चियों के साथ दुष्कर्म किए जाने की खबरें लगातार मिल रही हैं। मुस्लिमों ने हिंदू वकीलों, डॉक्टरों, व्यापारियों और दुकानदारों का बहिष्कार कर दिया है। इससे ये लोग पलायन को मजबूर हो रहे हैं। हिंदुओं द्वारा मजबूरी में बेचे जा रहे समान की मुसलमान आधी कीमत भी नहीं दे रहे हैं।'

'विभाजन के समय पश्चिमी पंजाब में पिछड़ी जाति के एक लाख लोग थे। उनमें से बड़ी संख्या को बलपूर्वक इस्लाम कबूल करवा दिया गया है। मुझे एक सूची मिली है, जिसके अनुसार कई मंदिरोंऔर गुरुद्वारों को कसाईखानों और मांस बेचने वाली होटलों में तब्दील कर दिया गया। आप कुछ करें, वरना यह अनर्थ और बढ़ जाएगा।'

मंडल के इस पत्र को पढ़कर लियाकत अली कोई कार्रवाई करने के बजाय कुटिलता से मुस्करा दिए थे, मानो यह सब उनकी सहमति से ही हो रहा था।

Posted By: Arvind Dubey