फाइनेंशिल एक्शन टॉस्क फोर्स यानी FATF की पेरिस में हुई बैठक से पाकिस्तान और प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए बुरी खबर आई है। बैठक में तय हुआ है कि पाकिस्तान को अभी ग्रे लिस्ट में ही रखा जाएगा। इस तरह आतंकी सगठनों पर आधी अधूरी और दिखावटी कार्रवाई करके ग्रे लिस्ट से बाहर होने की पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। ग्रे लिस्ट में रखने जाने का मतलब है कि FATF की नजर में आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई संतोषजनक नहीं है। ग्रे लिस्ट मे होने का मतलब है कि पाकिस्तान को अभी वह आर्थिक मदद नहीं मिलेगी, जिसकी आस वह दूसरे देशों से लगाए बैठा है। भारत की मांग है कि पाकिस्तान आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने के बजाए उन्हें पनाह दे रहा है, इसलिए इसे ब्लैक लिस्ट में डाला जाना चाहिए।

बैठक से ठीक पहले भारत ने पाकिस्‍तान पर हमला बोलते हुए कहा था कि पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों और मसूद अजहर, जकीउर रहमान लखवी जैसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों को सुरक्षित वातावरण मुहैया कराना जाना जारी है। पाकिस्तान ने टेरर फंडिंग रोकने के लिए फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) द्वारा निर्देशित 27 कार्रवाई बिंदुओं में से 21 पर ही काम किया है।

पाकिस्तान का FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहना इमरान खान के लिए भी मुश्किल बढ़ा सकता है। इमरान खान के खिलाफ पाकिस्तान में माहौल बनने लगा है। तमाम विपक्षी दर एक जुट हो रहे हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि अब तक इमरान खान का साथ देने वाली सेना भी अब पीछे हटने लगी है।

Posted By: Arvind Dubey

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