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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 04, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bilaspur Railway News: कटनी सेक्शन में ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से मिली राहत

टनी रेल खंड में मंगलवार से सभी ट्रेनों का परिचालन शुरू हो गया। इससे यात्रियों को राहत मिली है। दरअसल ट्रेन बंद होने से आम यात्रियों के अलावा व्यापारी,...और पढ़ें

By Abrak AkroshEdited By: Abrak Akrosh
Publish Date: Tue, 04 Oct 2022 11:06:44 PM (IST)Updated Date: Tue, 04 Oct 2022 11:06:44 PM (IST)
Bilaspur Railway News: कटनी सेक्शन में ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से मिली राहत

बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। कटनी रेल खंड में मंगलवार से सभी ट्रेनों का परिचालन शुरू हो गया। इससे यात्रियों को राहत मिली है। दरअसल ट्रेन बंद होने से आम यात्रियों के अलावा व्यापारी, छात्र और पर्यटक सभी परेशान थे। संसाधन के अभाव में उन्हें बड़ी दिक्कत हो रही थी। पर मंगलवार को इस रूट की सभी ट्रेनों में भीड़ दिखी। यह स्थिति छठ पर्व तक इसी तरह रहेगी। उसके बाद कुछ सामान्य रहेगा और फिर नए वर्ष को भीड़ शुरू हो जाएगी।

कटनी सेक्शन में पेड्रारोड समेत कई प्रमुख स्टेशन है, जहां से सभी वर्ग बिलासपुर या पेंड्रारोड से आगे के लिए यात्रा करते हैं। पर ट्रेन बंद होने से व्यवसाय के अलावा छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही थी। यात्री लगातार यह मांग कर रहे थे की कुछ ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया जाए, इससे कम से कम दैनिक यात्रियो को तो राहत मिलेगी। इस बीच रेलवे ने केवल कटनी लोकल ट्रेन को चलाने का निर्णय लिया। जबकि 37 ट्रेनें रद थी। यात्रियों की परेशानी को दरकिनार कर रेलवे लगातार कार्य कर रही है। यात्रियों का कहना है कि अधोसंरचना से जुड़े कार्य जरुरी है और यात्री का विरोध भी नहीं करते। पर रेलवे को कोई काम योजनाबद्ध तरीके से करना चाहिए।


लेकिन रेलवे में लगातार इसका अभाव दिख रहा है। इस सेक्शन में पिछले कई दिनों से केवल गिनती की ट्रेनें चल रही थी। पर पहले की तरह सभी ट्रेनें चलने लगी है। पहले ही दिन यात्रियों के चेहरे में राहत दिखी। मालूम हो की इसे सेक्शन प्रमुख मंदिरों के अलावा पर्यटन स्थल भी है। जहां लोग बड़ी संख्या में आवाजही करते हैं। भनवारटंक स्थित मरहीमाता मंदिर दर्शन करने के लिए जाने में रेलमार्ग ही सबसे सुविधाजनक है। सड़क मार्ग तो इतनी जर्जर है की गाड़ियां चल ही नहीं सकती। पैदल चलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प ही नहीं है। मुख्य मार्ग से मंदिर दूर है। इसलिए पैदल चलने में भी श्रद्धालुओं का हाल बेहाल हो जाता है। अमरकंटक जाने वाले पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन से उतरकर जाते हैं। पर ट्रेन के बिना केवल परेशानियां ही हो रही थीं।