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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 15, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

World Students’ Day 2022: अटल टिंकरिंग लैब के बाल विज्ञानियों ने विश्व में बनाई पहचान

जल्द ही यह आधुनिक कृषि यंत्र देशभर के किसानों के लिए बाजार में उपलब्ध होगा। आधुनिक खेती करने वाले किसानों के लिए यह नवाचार वरदान साबित होगा। चिता की र...और पढ़ें

By Abrak AkroshEdited By: Abrak Akrosh
Publish Date: Sat, 15 Oct 2022 02:25:26 AM (IST)Updated Date: Sat, 15 Oct 2022 02:25:26 AM (IST)
World Students’ Day 2022: अटल टिंकरिंग लैब के बाल विज्ञानियों ने विश्व में बनाई पहचान

बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जहां चाह वहां राह की कहावत को गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल दयालबंद के बाल विज्ञानियों ने न केवल सच साबित किया है वरन अपनी प्रतिभा से देश और दुनिया के विज्ञानियों को प्रभावित भी किया है। यह भी पहली बार हुआ जब नीति आयोग ने बाल विज्ञानियों के नवाचार अटल कृषि यंत्र के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति भी दी है। जल्द ही यह आधुनिक कृषि यंत्र देशभर के किसानों के लिए बाजार में उपलब्ध होगा। आधुनिक खेती करने वाले किसानों के लिए यह नवाचार वरदान साबित होगा। चिता की राख को परिष्कृत करने बनाई मोक्षा मशीन से सात समंदर पार धूम मचाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने भी इसकी सराहना की है। बाल विज्ञानियों को नवाचार के लिए अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी डा. धनंजय पांडेय की भूमिका कम असरदार नहीं है। यही प्रेरणास्रोत हैं और इनके ही मार्गदर्शन में बाल विज्ञानी नीत नए सफलता के आयाम तय कर रहे हैं। ये हैं बाल विज्ञानी जो गढ़ रहे सफलता

मोक्षा ने मचाई धूम,इंटरनेशनल रोबोटिक में बना सिरमौर

12 वीं के छात्र आदित्य श्रीवास की टीम ने चिता की राख को परिष्कृत करने मोक्षा मशीन बनाई है। इस मशीन को बाल विज्ञानियों की टीम और आधुनिक बनाने में जुटी हुई है। आदित्य बताते हैं कि मशीन के जरिये चिता की राख को परिष्कृत करने के अलावा जैविक खाद भी बना रहे हैं। खाद जा उपयोग बागवानी में किया जा रहा है। मोक्षा ने इंटरनेशनल रोबोटिक चैम्पियन में पहला स्थान अर्जित किया था। अब इस मशीन का व्यावसायिक उपयोग भी हो रहा है।


दिव्यांग बच्चों के लिए वरदान है रथ

उन माता पिता के दुख का आप अंदाजा नहीं लगा सकते जिनके जिगर का टुकड़ा दिव्यांग होने साथ ही स्पेशल चाइल्ड हैं। इनकी परेशानी भी बहुत है। माता-पिता चाहकर भी स्कूल नहीं भेज पाते। ऐसे बच्चों के लिए बाल विज्ञानी तरुण मैत्री व उसकी टीम ने अटल दिव्यांग रथ बनाया है। इस विशेष रथ में बैठकर बच्चे स्कूल में अपनी पढ़ाई कर सकते हैं। पेशाब लगने पर एक बटन दबाते ही रथ टायलेट बन जाता है। फ्रेश होने के लिये इसमें सिस्टम तैयार किया है।

अटल टिंकरिंग लैब के बाल विज्ञानियों को नवाचार ले लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। लैब के नवाचार को नीति आयोग की सराहना भी मिल रही है। बाल विज्ञानियों की प्रतिभा को देखते हुए उनकी रुचि के अनुसार लक्ष्य दिया जाता है। कड़ी मेहनत के दम पर ही सफलता मिल रही है।

डा. धनजंय पांडेय,प्रभारी अटल टिंकरिंग लैब गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल