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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 29, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

New Year 2023: नए साल पर पिकनिक स्पाट को रखें साफ, धरोहर से छेड़छाड़ करना गैर कानूनी, दोषी पाए जाने पर जेल

New Year 2023: छत्तीसगढ़ के पुरातत्व स्थल आन, बान, शान है। नए साल पर पुरातत्व स्थलों का ख्याल रखें। प्राचीन दीवारों पर कुछ न लिखें।

By Vinita SinhaEdited By: Vinita Sinha
Publish Date: Thu, 29 Dec 2022 07:30:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 29 Dec 2022 07:30:00 AM (IST)
New Year 2023: नए साल पर पिकनिक स्पाट को रखें साफ, धरोहर से छेड़छाड़ करना गैर कानूनी, दोषी पाए जाने पर जेल

रायपुर (श्रवण शर्मा)। यदि आप नए साल पर ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करने जा रहे हैं तो अपने देश के ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं से छेड़छाड़ न करें। उस स्थल के इतिहास की जानकारी लेकर अपना ज्ञान बढ़ाएं। अपने बच्चों को भी शिक्षा दें कि वे देश की धरोहर की रक्षा करें। धरोहर को किसी भी तरह से नुकसान न पहुंचाएं। साथ ही ऐतिहासिक स्थलों पर गंदगी न फैलाएं, साफ रखें, ताकि अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटक हमारी धरोहर से रू-ब-रू हो सकें। धरोहर से छेड़छाड़ करते पाए जाने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो सकता है और कारावास अथवा जुर्माना भरना पड़ सकता है। यह कहना है संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के सहायक संचालक और महंत घासीदास संग्रहालय के अध्यक्ष प्रतापचंद्र पारख का।

देश का नौवां प्रसिद्ध म्यूजियम

नईदुनिया से विशेष बातचीत में संग्रहालय अध्यक्ष पारख ने बताया कि रायपुर का म्यूजियम देशभर में नौंवा प्रसिद्ध और पुराना म्यूजियम है। म्यूजियम में प्राचीन मूर्तियां, शिलालेख, सिक्के, शस्त्र समेत अनेक ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं हैं, जिनसे छत्तीसगढ़ के प्राचीन वैभव, कला, संस्कृति की जानकारी आमजनों को मिलती है। म्यूजियम में किसी भी चीज को हाथ लगाने की मनाही है।


लक्ष्मण मंदिर, भोरमदेव मंदिर हमारी पहचान

राजधानी के म्यूजियम में खोदाई में प्राप्त सिक्कों, बर्तनों, मूर्तियों को तो रखा ही गया है, साथ ही राज्य के प्रसिद्ध स्थलों का प्रतिरूप बनाकर भी रखा गया है। इन प्रतिरूपों को देखकर लोग उन स्थलों को करीब से जाकर देखें और राज्य के प्राचीन वैभव को महसूस करें। ऐसे स्थलों में सिरपुर का ईंटों से बना लक्ष्मण मंदिर, कवर्धा का भोरमदेव मंदिर, बस्तर का दंतेश्वरी मंदिर, रतनपुर का महामाया मंदिर, रायपुर का ऐतिहासिक दूधाधारी मठ समेत अनेक पर्यटन स्थल भी ऐसे हैं, जहां बौद्ध धर्म स्थल, जैन धर्म के तीर्थंकरों की प्रतिमाएं हैं। जब भी इन जगहों में जाएं तो उन धरोहरों को दूर से देखें, किसी भी तरह का नुकसान न पहुचाएं।

हमारी आन, बान, शान है धरोहर

छत्तीसगढ़ के पुरातत्व स्थल हमारी आन, बान, शान है। अपने बच्चों को नए साल पर पुरातत्व स्थलों पर लेकर जाएं लेकिन उसकी सुरक्षा करने के प्रति स्वयं जागरूक रहें और बच्चों को भी जागरूक करें।

ऐतिहासिक स्थलों पर बरतें सावधानी

- प्राचीन दीवारों पर कुछ भी न लिखें।

- पानी बोतल, पाउच, खाद्य वस्तुओं के पैकेट न फेंकंे।

- मूर्तियों के ऊपर न चढ़ें, सटकर भी खड़े न रहें।

- मूर्तियों को न खरोंचें, तोड़फोड़ न करें।

- कोई लावारिस वस्तु मिलने पर स्टाफ को सूचित करें।

- वाहनों की सही जगह में ही पार्किंग करें।

यह है नियम

पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958 और संशोधित अधिनियम 2010 के अनुसार ऐतिहासिक भवनों, मूर्तियों, अवशेषों को नुकसान पहुंचाने पर दो साल का कारावास, एक साल तक की सजा का प्रविधान है।