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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 02, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

फ्री वाई-फाई का करते हैं यूज तो ये खबर है आपके लिए, किसी भी लिंक को खोलने से पहले जान लें ये बातें

ठग क्रेडिट कार्ड बनवाने के, केवाइसी, ओएलएक्स पर बिक्री, इनाम निकलने और बीमा पालिसी पर इनाम के नाम पर ठगी को अंजाम दे रहे हैं।

By Vinita SinhaEdited By: Vinita Sinha
Publish Date: Mon, 02 Jan 2023 12:42:12 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Jan 2023 12:42:12 PM (IST)
फ्री वाई-फाई का करते हैं यूज तो ये खबर है आपके लिए, किसी भी लिंक को खोलने से पहले जान लें ये बातें

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। तकनीक के इस दौर और भागदौड़ भरी जिंदगी में आनलाइन कामकाज जितना सुखद है, उतना ही जोखिम भरा हो गया है। जोखिम की वजह है... साइबर क्राइम। साइबर हैकर हर दिन नए-नए तरीके ईजाद कर मेहनत से कमाई गई लोगों की रकम को एक झटके में ठग लेते हैं। कहने को रायपुर जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक पर पुलिस की साइबर टीमें लगातार इन पर शिकंजा कसने को प्रयासरत है। इसके बावजूद जरूरत है खुद जागरूक रहने की।

ठग क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर, केवाइसी के नाम पर, ओएलएक्स पर बिक्री के नाम पर, इनाम निकलने और बीमा पालिसी पर इनाम के नाम पर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। साइबर ठगों के इन पैंतरे से बचने की जरूरत है। ठगों के झांसे में आने से कैसे बचें, इस पर एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट व रायपुर के एडिशनल एसपी सिटी अभिषेक माहेश्वरी से सीनियर रिपोर्टर सतीश पांडेय की बातचीत। बातचीत के मुख्य अंश:-


0 साइबर ठगों से लोग खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

शातिर साइबर ठगों नए-नए पैतरे से बचने के लिए लोगों को सर्तकर्ता के साथ जागरूक होने की जरूरत है। खासतौर पर अपने मोबाइल, लैपटाप को हमेशा पासवर्ड से सुरक्षित रखे। डिवाइस को अपडेट करते रहे। अनाधिकृत स्त्रोतों से कोई भी एप डाउनलोड न करें, अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें। एनी डेस्क, टीम व्यूवर जैसे रिमोट एक्सेस, साफ्टवेयर इंस्टाल करने से बचे। कभी भी फ्री वाई-फाई या फिर इंटरनेट के किसी अन्य स्त्रोत का उपयोग न करें।

0 पीड़ित साइबर ठगी का शिकार होने पर सबसे पहले क्या करे?

साइबर क्राइम अथवा आनलाइन ठगी का शिकार होने पर सबसे पहले संबंधित बैंक को असली वेबसाइट के माध्यम से या ईमेल के माध्यम से सूचित करें। सभी बैंकों के ऐप में भी शिकायत करने की सुविधा दी जाती है। पेटीएम, फोन-पे जैसे एप से ठगी होने पर इन कंपनियों को उनकी वेबसाइट या ऐप से बतायें। सरकार ने भी साइबर ठगी को लेकर आनलाइन ठगी का शिकार हुए लोगों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नम्बर- 1930 की शुरुआत की है। ठगी का शिकार हुए व्यक्तियों के लिए विशेष ध्यान रखने योग्य बात यह कि घटना के बाद जितने कम समय में शिकायत की जाएगी। आनलाइन धोखाधड़ी से ठगे गए पैसे वापस होने की उम्मीद उतनी ज्यादा होगी।

0 लोगों को अपने डाटा सुरक्षित रखने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

लोगों को इससे बचने के लिए हमेशा अपने डिवाइस में वास्तविक आपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करना चाहिए। डिवाइस को नियमित रूप से अपडेट करते रहना चाहिए। हमेशा अपने घर और कार्यालय के राउटर और मोडम का डिफाल्ट पासवर्ड बदलते रहना चाहिए। बाहरी नेटवर्क को अपने डेटा तक पहुंचने से बचाना चाहिए।

0 साइबर ठग महिलाओं से आनलाइन ठगी करने के साथ ही ब्लेकमेल भी करते है। इसपर रायपुर पुलिस क्या कर रही है?

'सूनो रायपुर (साइबर जागरूकता अभियान) के जरिए स्कूल-कालेजों के अलावा निजी संस्थाओं और ग्रामीण इलाकों में पुलिस की साइबर विंग जाकर विभिन्ना कार्यशालाएं आयोजित कर रही रही है। इस अभियान में लोगों को नवीनतम साइबर अपराध से बचाने के लिए अलर्ट कर रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध के मामलों को काफी गंभीरता से लेकर जांच किया जाता है। पहले हम ऐसे कई प्रकरणों में आरोपितों को दूसरे राज्यों से गिरफ्तार कर जेल भी भेज चुके हैं। 15 अगस्त से 21 अगस्त 2022 तक 747 स्थानों में सुनो रायपुर साइबर जागरूकता अभियान चलाकर एक लाख से ज्यादा पंपलेट वितरित करके 16 लाख 11 हजार 718 नागरिकों को साइबर अपराध, ठगी संबंधी जानकारी देकर जागरूक करने का काम किया है। इसके परिणाम भी बेहतर आए हैं।

0 फिशिंग क्या है और इसे कैसे रोका जा सकता है?

फिशिंग एक ऐसा अपराध है, जहां लोग अपनी गोपनीय जानकारी जैसे- पासवर्ड और क्रेडिट कार्ड नंबर गलती से साइबर ठगों से साझा कर देते हैं। इसके बाद ठग उनके पूंजी पर अपना कब्जा कर लेते हैं या किसी और खाते में भेज देते हैं। वर्तमान में वायस, एसएमएस, खोज इंजन परिणाम फिशिंग के जरिए ठगी की घटना हो रही है। इससे बचने की जरूरत है।

0 रायपुर पुलिस किस तरह से पीड़ितों को न्याय दिलाने का काम कर रही है?

रायपुर पुलिस लगातार साइबर ठगों की चुनौतियों को स्वीकार कर काम कर रही है। वर्ष- 2022 में हमने आनलाइन ठगी के साइबर सेल व पुलिस थानों से प्राप्त कुल 1935 प्रकरणों में से 617 प्रकरणों में 56 लाख 14 हजार 528 रुपये की रकम वापस कराया गया है। एनसीसीआर पोर्टल पर प्राप्त कुल 2163 शिकायतों में से 355 प्रकरणों में कुल 33 लाख 18 हजार 541 रुपये होल्ड कराया गया है, जिसमें से 4 लाख 89 हजार 902 रुपये वापस पीड़ितों को दिलाया जा चुका है। इसी तरह से आनलाइन शापिंग साइट जैसे- फ्लिप कार्ड, अमेजन आदि से आर्डर देकर खरीदे जा रहे 589 चाकू को जब्त किया गया है।

0 गुम और चोरी मोबाइल को लेकर पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने की शिकायते है, इस पर आप क्या कहेंगे?

फिलहाल हमें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। गुम और चोरी हुए मोबाइल को लेकर पुलिस गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। वर्ष- 2022 में विभिन्ना थानों से प्राप्त गुम मोबाइल को प्रदेश समेत अन्य राज्यों से बरामद कर डेढ़ करोड़ के कुल 610 मोबाइल को उनके मालिकों को लौटाया गया है। नए साल के पहले दिन ही हमने पचास लाख कीमत के 223 मोबाइल फोन लौटाया।