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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 01, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मृगनयनी की साड़ी में दिखेगी भीमबेटका के शैलचित्र की झलक

मृगनयनी की साड़ी में दिखेगी भीमबेटका के शैलचित्र की झलक -डॉ वाकणकर को समर्पित होगा भीमबेटका साड़ी ब्रांड अम्बुज माहेश्वरी। रायसेन मध्यप्रदेश के रायसेन ज...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Tue, 01 Sep 2020 04:10:29 AM (IST)Updated Date: Tue, 01 Sep 2020 04:10:29 AM (IST)
मृगनयनी की साड़ी में दिखेगी भीमबेटका के शैलचित्र की झलक

मृगनयनी की साड़ी में दिखेगी भीमबेटका के शैलचित्र की झलक

-डॉ वाकणकर को समर्पित होगा भीमबेटका साड़ी ब्रांड

अम्बुज माहेश्वरी। रायसेन

मध्यप्रदेश के रायसेन जिल में स्थित विश्व धरोहर भीमबेटका के शैलचित्र की झलक जल्द ही मृगनयनी की साड़ियों में भी दिखाई देगी। भीमबेटिका हैरिटेज कलेक्शन के नाम से बाजार में आने वाली साड़ियों को भीमबेटका की खोज करने वाले महान अन्वेषक प्रो डॉ विष्णु श्रीधर वाकणकर की स्मृति में समर्पित किया जाएगा। प्रदेश के हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम के ब्रांड मृगनयनी के शोरूम से सितंबर के दूसरे सप्ताह से साड़ियों की बिक्री होगी। इनकी शुरुआती कीमत 8 हजार रुपए होगी। साड़ियों के लिए महेश्वर और चंदेरी से तैयार कपड़ा आ रहा है, जिस पर शैलचित्र के डिजाइन और अन्य प्रिंट का काम भोपाल में हो रहा है।

अदिमानवों की आश्रयस्थली

राजधानी भोपाल से महज 44 किमी दूर रायसेन जिले के औबेदुल्लागंज ब्लॉक में स्थित विश्व धरोहर भीमबेटिका अदिमानवों की आश्रयस्थली है। मानव जाति के विकास की कहानी यहां के पत्थरों में दर्ज है। मप्र के नीमच में जन्मे डॉ विष्णु श्रीधर वाकणकर ने ही सन 1957-58 में भीमबेटिका में 30 हजार साल पुराने शैलचित्रों को खोजा था। इसके लिए उन्हें पदमश्री से भी सम्मानित किया गया था। भीमबेटिका के शैलचित्र 1 लाख वर्ष पुराने बताए जाते हैं। इन चित्रों का परीक्षण कॉर्बन-डेटिंग पद्धति से किया था। इसी से इन चित्रों के काल-खंड का ज्ञान होता है। दुनिया भर के लोग यह देखने आते हैं कि रायसेन जिले में स्थित भीमबेटका गुफाओं में मनुष्य रहता था और वह चित्र भी बनाता था।


मंदी के दौर में लिखी सफलता की इबारत

मृगनयनी ने मंदी के दौर में भी नए उत्पाद बाजार में लाकर सफलता की इबारत लिखी है। हथकरघा विकास निगम के एमडी राजीव शर्मा बताते हैं कि इस सफलता के पीछे निगम की टीम का वित्तीय अनुशासन, नवाचार, सतत संवाद और बुनकरों की मेहनत मुख्य वजह रही। हमने कारोबार को विस्तार देने के लिए छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के साथ समझौता किया। इससे शोरूम पर वेरायटी बढ़ी और निगम को बिना लागत नया मार्केट मिला। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए समय-समय पर नए उत्पाद लांच किए। इसके अलावा पहले सिर्फ वीआईपी को उत्पाद पर जो छूट मिलती थी, उसे आमजन के लिए भी शुरू किया। इससे मंदी में भी अच्छा व्यापार चला।

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31 रायसेन 01 व 31 रायसेन 02

फोटो कैप्शन

रायसेन। हथकरघा विकास निगम के ब्रांड मृगनयनी की नई साड़ियों में इस तरह दिखेंगे शैलचित्र के प्रिंट। नवदुनिया