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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 13, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मातृभाषा कोई और पर हिंदी से है प्यार

मातृभाषा कोई और पर हिंदी से है प्यार-00 अहिंदी भाषी हिंदीसेवियों से बातचीत हिंदी दिवस विशेष सुशील पाण्डेय । भोपाल प्रेम, संस्कृति और मानवीय संवेदना की...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Sun, 13 Sep 2020 02:21:13 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2020 02:21:13 PM (IST)
मातृभाषा कोई और पर हिंदी से है प्यार

मातृभाषा कोई और पर हिंदी से है प्यार-00

अहिंदी भाषी हिंदीसेवियों से बातचीत

हिंदी दिवस विशेष

सुशील पाण्डेय । भोपाल

प्रेम, संस्कृति और मानवीय संवेदना की भाषा हिंदी विश्वभर में अपने पैर जमा चुकी है। इसमें अहिंदी भाषी मित्रों और प्रेमियों का अहम योगदान है। विभिन्न क्षेत्रों और विधाओं में कार्यरत इन हिंदी सेवियों की मातृभाषा भले ही कोई और रही हो, लेकिन इन्होंने हिंदी में जो कार्य किए, उससे लगता ही नहीं है कि वे अहिंदी भाषी हैं। हिंदी दिवस पर हमने शहर के अहिंदी भाषी हिंदी सेवियों से चर्चा कर उनके कार्यों को जाना।

पुलिस अफसर के साथ लेखक और ओज कवि

लेखक और कवि मदनमोहन 'समर' का जन्म भले ही मध्यप्रदेश में हुआ हो, लेकिन उनकी मातृभाषा पंजाबी है। मप्र पुलिस में निरीक्षक के पद पर सेवा देने के साथ ही हिंदी में कविता, कहानी, आलेख, व्यंग्य और उपन्यास लेखन में उन्हें महारथ हासिल है। समर 10 वें विश्व हिंदी सम्मेलन, भोपाल और 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन, मॉरीशस में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। मंच के ओज कवि के रूप में दिल्ली स्थित लालकिला समेत देश-विदेश में काव्य पाठ किया है, उनकी किताब 'समय समेटे साक्ष्य', कविता संग्रह 'सियाल कोट की सरहद', 'पानी की परत' और खंडकाव्य 'जीवन में कुछ और बहुत है' सराही गई हैं।


हिंदी को बनाया सेवा का जरिया

लेखिका और कवियत्री जया आर्य के माता-पिता कोयम्बटूर के निवासी थे, लेकिन जया का जन्म पूना में हुआ। मूलतः तमिल भाषी जया की हिंदी में गहरी पकड़ है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पहले ही प्रयास में आकाशवाणी में उद्घोषक की नौकरी मिली थी। उद्घोषक के रूप में 35 साल तक सेवा देने के बाद वे राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से जुड़ गईं, वे हिंदी में मंच संचालन, रेडियो, टीवी पर बोलने का प्रशिक्षण देती हैं। उनकी दो किताबें-'लघुकथा सतक' और कविता संग्रह 'गुनगुनाते बोल' प्रकाशित हो चुकी हैं। जया वर्तमान में लघु कथा शोध केंद्र की उपाध्यक्ष और संयोजिका हैं। कविता गोष्ठियों में उनकी रचनाओं को खूब पसंद किया जाता है।

बैंकिंग व रंगकर्म के माध्यम से हिंदी की सेवा

रंगकर्मी और निर्देशक अशोक बुलानी मूलतः सिंधी भाषी हैं। स्टेट बैंक में सेवा के दौरान हिंदी प्रेम के कारण उन्हें हिंदी अधिकारी का दायित्व मिला था। इस दौरान उन्होंने बैंक के कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के सराहनीय प्रयास किए, उनके और कवि राजेश जोशी के प्रयास से भोपाल में स्टेट बैंक का नाट्य समारोह शुरू हुआ, जो 25 साल तक चला। बुलानी को हिंदी कहानियों के नाट्य मंचन में महारथ हासिल है, वे हर साल मुंशी प्रेमचंद की जयंती (31जुलाई) के मौके पर भोपाल में तीन दिवसीय नाट्य समारोह आयोजित करते हैं। वे मप्र सिंधी अकादमी के निदेशक तथा टीवी और रेडियो के बी हाई श्रेणी के कलाकार रह चुके हैं।

फोटो कैप्शन

-13 जया आर्य 01

-13 मदन मोहन समर 02

-13 अशोक बुलानी 03