
करमाकड़ी निमनी के किसानों ने सुनाई प्रशासन को अपनी व्यथा
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सुनील नत्थू तांडेकर रामपेठ का मकान बारिश में पूरी तरह ढह गया
सौंसर (नवदुनिया न्यूज)। ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ के कारण हुए नुकसान को देखकर किसानों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, इस भीषण बाढ़ के चलते किसानों के सुख दुख में साथ देने वाले बैल बाढ़ में बह गए, एक और जहां फसल तो चौपट हो गई वहीं खेती करने वाली सामग्री भी पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। अब किसानों के सामने फिर से जीवन शुरू करने के लिए आर्थिक सहयोग और संसाधनों की कमी पड़ रही है। बाढ़ ने सैकड़ों किसानों की घर गृहस्थी बर्बाद करते हुए परिवार को सड़क पर ले आई है। सोमवार को बाढ़ से पीड़ित रामपेठ, करर्माकडी, जोबनी, पलासपानी, बेरडी, संगम सायरा के कई किसानों आंखों में आंसू ओर बर्बादी का मंजर लेकर अपनी आपबीती प्रशासन के अधिकारी को सुना कर न्याय की गुहार लगाई है।
जनपद पंचायत सदस्य संदीप भकने, राजा बोढे के साथ निमनी के किसान, दीपक बडोले, निलेश डवले, पंकज तबले, टीकाराम भुजाडे, अशोक भोयर, भास्कर हिवरे, ग्राम करमाकडी के किसान हेमराज गोहने, देवेंद्र तेलगे, राजू गोहने, खुशाल चौधरी ने बताया कि कन्हान नदी में भीषण बाढ़ से करमाकड़ी के सभी किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, बाढ़ में घर गृहस्थी के सामान के साथ खानपान सामान भी बह गया है।
साहब घर में खाने को नहीं हैः
बाढ़ ने फसल चौपट करने के साथ-साथ कई परिवारों का आशिया भी उजाड़ने का काम किया है, मकान बाढ़ में गिरने के साथ-साथ मकान में रखे खाने-पीने की सामग्री भी पूरी तरह खराब हो गई है अब कई परिवार ऐसे हैं जिनके पास में दो वक्त की रोटी की खाने की वर्तमान में व्यवस्था नहीं है। किसान सुनील नत्थू तांडेकर निवासी रामपेठ का मकान भारी बारिश में पूरी तरह ढह गया,घर में वृद्ध माता पिता थे। समय रहते उनको निकाल लिया इसलिए वो सुरक्षति है, घर टूटने और बाढ़ में बहने के बाद अब किसान सुनील के दो छोटे बच्चे व पत्नी के साथ दूसरे के घर पे रहने मजबूर हैं। वहीं ग्राम सायरा के किसान शंकरराव गर्वे, देवरावजी हरिबा घनशाम ने आदी कीसानो सौसर तहसील कार्यालय में अधिकारियों को अपनी व्यथा सुनाने आए तो बताया कि ग्राम सायरा में हमारी पूरी फसल नष्ट हो गई है, वही कोठे में बंधे बकरियां गाय बैल बह गए।