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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 14, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इस साल नहीं बरसेंगे पत्थर, कोरोना संक्रमण के चलते लगी गोटमार मेले पर रोक

कलेक्टर और एसपी ने बैठक में लिया फैसला छिंदवाड़ा। पांढुर्णा में जाम नदी पर हर साल मनाया जाने वाला गोटमार मेला इस साल कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण नह...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Fri, 14 Aug 2020 04:24:32 AM (IST)Updated Date: Fri, 14 Aug 2020 04:24:32 AM (IST)
इस साल नहीं बरसेंगे पत्थर, कोरोना संक्रमण के चलते लगी गोटमार मेले पर रोक

कलेक्टर और एसपी ने बैठक में लिया फैसला

छिंदवाड़ा। पांढुर्णा में जाम नदी पर हर साल मनाया जाने वाला गोटमार मेला इस साल कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण नहीं होगा। इस बार औपचारिकता के तौर पर सिर्फ देवी मंदिर में पूजा अर्चना होगी। इसे लेकर गुरुवार को कलेक्टर सौरभ सुमन, एसपी विवेक अग्रवाल की मौजूदगी में आयोजित बैठक में फैसला लिया गया। कलेक्टर सौरभ सुमन ने बताया कि हर साल परंपरागत तौर पर मनाया जाने वाला गोटमार मेला में इस बार पत्थरों की लड़ाई नहीं होगी। सिर्फ परंपरा का निर्वहन करते हुए पूजा अर्चना की जाएगी, जाम नदी पर झंडा नहीं गड़ाया जाएगा। श्री सुमन ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते ये फैसला लिया गया है। हर साल पोला के दूसरे दिन मेले का आयोजन होता है, इस बार पोला 18 अगस्त को है, लिहाजा 19 अगस्त को मेले का औपचारिक आयोजन होगा।

सालों पुरानी है परंपरा

गोटमार मेले की शुरुआत 17वीं इसवी के करीब मानी जाती है। महाराष्ट्र की सीमा से लगे पांढुर्णा में हर साल भादो मास के कृष्ण पक्ष पक्ष में अमावस्या को पोला त्योहार के दूसरे दिन पांढुर्णा और सावंगा गांव के बीच बहने वाली जाम नदी पर आयोजान होता है। जहां देवी का झंडा गाड़ने के बाद दोनों गांव के लोग एक दूसर पर पत्थर फेंकते हैं। इस मेले में हर साल पथराव में कई लोग घायल हो जाते हैं, अब तक 13 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इस बार पोला 18 अगस्त को है, लिहाजा इस बार 19 अगस्त को गोटमार मेले का आयोजन किया जाएगा।


इनका कहना है

बैठक में तय किया गया है कि इस साल मेले में पत्थरबाजी नहीं होगी, सिर्फ औपचारिकता के तौर पर झंडे की पूजा होगी। ग्रामीणों को भी इसे लेकर समझाइश दी जाएगी।

सौरभ सुमन, कलेक्टर