
Congress President: कांग्रेस के दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के नए अध्यक्ष होंगे। खड़गे ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया है। पार्टी के इतिहास में करीब दो दशक के बाद अध्यक्ष पद का चुनाव हुआ। 24 साल बाद गांधी परिवार से बाहर का अध्यक्ष कांग्रेस को मिला है। लेकिन नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने चुनौतियों का पडाड़ है। खड़गे की ताजपोशी ऐसे वक्त में हुई है, जब पार्टी सबसे कमजोर मुकाम पर खड़ी है। कांग्रेस का जनाधार सिमटता जा रहा है। नेताओं का पार्टी छोड़ने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इधर गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधान चुनाव का शंखनाद हो चुका है। ऐसे में मल्लिकार्जुन के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है। साथ ही बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने के सिलसिले को रोकने का चैलेंज है।
मल्लिकार्जुन खड़गे की पहली परीक्षा
खड़गे के हाथों में पार्टी की कमान ऐसे समय आई है। जब गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव है। गुजरात में कांग्रेस 27 साल और हिमाचल में पांच साल से बाहर है। ऐसे में मल्लिकार्जुन की पहली परीक्षा दोनों राज्यों में चुनाव में है। हिमाचल में भाजपा और कांग्रेस की सीधी लड़ाई है, लेकिन गुजरात में पार्टी का मुकाबला बीजेपी और आम आदमी पार्टी के साथ है।
संगठन को खड़ा करना
मल्लिकार्जुन खड़गे को सबसे पहले कांग्रेस नेताओं में आत्मविश्वास पैदा करना होगा। साथ ही जमीन स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए कुछ कदम उठाने होंगे। जिससे पार्टी में भविष्य को लेकर अच्छे लीडर सामने आए। कांग्रेस संगठन बिखरा हुआ है। ऐसे में दोबारा से पार्टी को खड़े करना का काम मल्लिकार्जुन को करना है।
वरिष्ठ और युवाओं के बीच संतुलन
पार्टी के अंदर युवा और वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन नहीं है। जिसके कारण बड़े नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मनुमटाव जग जाहिर है। अन्य राज्यों में भी युवा और सीनियर नेताओं के बीच तालमेल नहीं हैं। ऐसे में खड़गे के सामने युवा और बुजुर्ग नेताओं को साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती है।
सत्ता में बनाए रखने की चुनौती
कांग्रेस का राजनीतिक आधार खिसकता जा रहा है। पार्टी फिलहाल राजस्थान और छत्तीसगढ़ में है, जबकि झारखंड, बिहार और तमिलनाडु में सहयोगी रूप में है। यदि पार्टी आगे अपनी सरकार बचाने में सफर नहीं होती है, तो भाजपा का कांग्रेस मुक्त भारत का नारा साकार हो जाएगा।