
बिजनेस डेस्क। भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाले सबसे बड़े दिन यानी 'यूनियन बजट' में अब बस कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं। कल, 1 फरवरी (रविवार) को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का लेखा-जोखा पेश करेंगी। यह उनका लगातार 9वां बजट होगा। इस ऐतिहासिक मौके से पहले चर्चा उन रिकॉर्ड्स की हो रही है, जो भारत के बजटीय इतिहास में मील का पत्थर माने जाते हैं।
बजट भाषण की अवधि (समय) के मामले में वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कोई सानी नहीं है। उन्होंने साल 2020 में भारत के इतिहास का सबसे लंबा बजट भाषण दिया था, जो 2 घंटे और 42 मिनट तक चला था। इस मैराथन स्पीच के दौरान उनकी तबीयत भी कुछ नासाज हुई थी, लेकिन उन्होंने अपने ही 2019 के 2 घंटे 17 मिनट के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था।
जहां निर्मला सीतारमण ने 'समय' के मामले में बाजी मारी है, वहीं 'शब्दों' के लिहाज से रिकॉर्ड आज भी पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नाम है।
इस साल का बजट कई मायनों में अनूठा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि 1 फरवरी को रविवार है। छुट्टी का दिन होने के कारण उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार बजट की डिजिटल व्यूअरशिप (टीवी और मोबाइल पर देखने वालों की संख्या) पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
नौकरीपेशा वर्ग से लेकर छोटे कारोबारियों तक, सबकी नजरें निर्मला सीतारमण के पिटारे पर टिकी हैं। यह बजट केवल सरकारी खर्च का ब्यौरा नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा रोडमैप होगा जो तय करेगा कि:
कल सुबह 11 बजे जब वित्त मंत्री अपना बजट भाषण शुरू करेंगी, तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह समय या शब्दों का कोई नया रिकॉर्ड बनाती हैं या फिर कम समय में बड़ी घोषणाओं के जरिए जनता का दिल जीतती हैं।