
बिजनेस डेस्क। बारिश के कारण फिलहाल ज्यादातर निर्माण कार्य धीमे हैं, लेकिन मानसून के विदा होते ही काम में तेजी आएगी। ऐसे में बढ़ी कीमतों का सीधा असर सरकारी परियोजनाओं, ठेकेदारों और गरीबों के लिए बन रहे पीएम आवास पर पड़ने की आशंका है।
नान-ट्रेड के बाद खुले बाजार में बिकने वाले सीमेंट के दाम भी करीब 20 रुपये बढ़ाने की तैयारी है। बता दें कि छत्तीसगढ़ देश का छठा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक राज्य है। यहां देश के कुल सीमेंट उत्पादन का लगभग चार से पांच प्रतिशत हिस्सा उत्पादित होता है और राज्य की वार्षिक क्षमता करीब 2.5 से तीन करोड़ टन तक है। राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले चूना पत्थर के विशाल भंडार मौजूद हैं।
बलौदा बाजार-भाटापारा जिला राज्य का सीमेंट हब है। ओपीसी के दाम भी 90 रुपये तक बढ़ेसरकारी निर्माण कार्यों में पोर्टलैंड पोजोलोना सीमेंट (पीपीसी) के साथ साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (ओपीसी) सीमेंट का भी इस्तेमाल होता है। ओपीसी के दाम पहले करीब 270 रुपये प्रति बोरी थे, जो बढ़कर 360 रुपये हो गए हैं। ओपीसी में फ्लाईएश नहीं मिलाया जाता, जबकि पीपीसी में फ्लाईएश का उपयोग होता हैं।
बड़े भवनों, फ्लाईओवर और पुल जैसे निर्माण में ओपीसी का इस्तेमाल अधिक किया जाता हैं।
नान-ट्रेड सीमेंट के बाद अब कंपनियां खुले बाजार के सीमेंट के दाम भी बढ़ाने की तैयारी में हैं। वर्तमान में थोक में सीमेंट करीब 230 से 270 रुपये और खुदरा बाजार में 240 से 280 रुपये प्रति बोरी मिल रहा है।
कारोबारियों के मुताबिक, बारिश के कारण मांग फिलहाल कमजोर है और केवल जरूरी निर्माण कार्य ही चल रहे हैं। इसके बावजूद कीमत बढ़ने से निर्माण क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बड़ी परियोजनाओं की बढ़ेगी लागत प्रदेश में नवा रायपुर स्थित राजभवन सहित एनआरडीए की करीब 700 से 800 करोड़ रुपये की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
आंबेडकर अस्पताल में भी चार बड़ी इमारतों का निर्माण चल रहा है। इसके अलावा पांच नए मेडिकल कालेजों के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम जारी है।
प्रदेशभर में पीएम आवास और कंक्रीट सड़कों की हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं भी चल रही हैं। बारिश थमने के बाद इन परियोजनाओं में निर्माण गति पकड़ने पर सीमेंट की बढ़ी कीमत का असर लागत पर दिखाई देगा।
बिल्डर एसोसिएशन आफ इंडिया की छत्तीसगढ़ शाखा के प्रदेश अध्यक्ष रूपेश सिंघल के अनुसार, नान-ट्रेड सीमेंट के दाम में 60 रुपये की वृद्धि करीब 30 प्रतिशत तक बैठती है। उनके मुताबिक इसका असर सरकारी योजनाओं की लागत पर पड़ेगा और बढ़ी कीमत से ठेकेदारों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।