कच्चे तेल में फिर लगी आग! ब्रेंट क्रूड $110 के पार, क्या भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। मंगलवार को तेल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई थीं, लेकिन बढ़ते भू-र...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 21 Oct 2026 10:35:20 AM (IST)Updated Date: Wed, 21 Oct 2026 10:35:20 AM (IST)
कच्चे तेल में फिर लगी आग! ब्रेंट क्रूड $110 के पार, क्या भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?HighLights
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी
- हमलों के कारण तेल सप्लाई को लेकर वैश्विक चिंताएं काफी बढ़ गई
- बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख समुद्री रास्तों के तेल टैंकरों पर हमलों
बिजनेस डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ने से कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी कहा है कि ईरान के साथ शांति समझौता करना बेहद मुश्किल है और जब तक तेहरान स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से गुजरने वाले मर्चेंट शिप्स को निशाना बनाना बंद नहीं करता, तब तक उस पर आर्थिक दबाव जारी रहेगा।
आज सुबह ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.25% की तेजी के बाद $110.168 प्रति बैरल और US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 1.20% की तेजी के बाद $98.989 प्रति बैरल पर आ गई।
भारत के लिए चिंता
भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी चिंता का विषय है। महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ा सकता है और रुपये पर दबाव डाल सकता है।
हालांकि, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कितना बदलाव होगा, ये सरकारी टैक्स, तेल कंपनियों के रिफाइनिंग खर्च और डॉलर-रुपये की स्थिति पर निर्भर करती हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज और ओमान की खाड़ी में हमले तेज
- स्ट्रेट ऑफ होर्मूज और ओमान की खाड़ी जैसे प्रमुख समुद्री जलमार्गों में तेल ले जाने वाले टैंकरों पर हमले लगातार जारी हैं।
- शिपट्रैकर 'केप्लर' के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में ही 18 तेल जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में ईरानी हमलों के साथ-साथ अब ओमान की खाड़ी तक तेल सप्लाई करने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है।
- इन हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव
- ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वे सऊदी अरब के कई प्रमुख ठिकानों और तेल रिफाइनरियों को भारी नुकसान पहुंचा चुके हैं।
- हाल ही में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के रियाद और आभा एयरपोर्ट पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली है।
- दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत में भी कोई खास प्रगति नहीं दिख रही है।
- पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच जल्द बातचीत से नई डील पर सहमति बन सकती है।
- हालांकि, अमेरिका द्वारा ईरान के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद अब ईरान भी अमेरिकी प्रस्ताव पर जवाब देने में देरी कर रहा है।