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बिजनेस डेस्क। सबसे पहले समझिए कि टैक्स क्या होता है। टैक्स वह पैसा है जो हम सरकार को देते हैं। सरकार इस पैसे का इस्तेमाल पब्लिक सर्विसेज और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में करती है।
सरकार इसी पैसे का इस्तेमाल सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए करती है।
टैक्स दो तरह के होते हैं डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स।
डायरेक्ट टैक्स वह टैक्स है जो सीधे आपकी कमाई या मुनाफ़े पर लगता है। जैसे अगर आप सैलरी कमा रहे हैं, अगर आपकी Taxable income है तो इस पर इनकम टैक्स लग सकता है।
वहीं इनडायरेक्ट टैक्स आप कोई सामान खरीदते वक्त देते हैं। जैसे आपने ₹1,000 का कोई प्रॉडक्ट खरीदा और उस पर जीएसटी लगा। आप जीएसटी सरकार को सीधे नहीं देते, बल्कि दुकानदार आपसे जीएसटी लेकर सरकार को जमा करता है। इसलिए इसे इनडायरेक्ट टैक्स कहते हैं।
पैन कार्ड इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ़ से दिया गया एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर है, जिससे आपके टैक्स से जुड़े वित्तीय लेन-देन का हिसाब रखा जाता है।
अगर आपकी इनकम Taxable है, तो आपको कितना टैक्स देना पड़ेगा यह समझने के लिए टैक्स स्लैब होता है।
टैक्स स्लैब में कमाई के अलग-अलग स्तर तय होते हैं, और उसी के हिसाब से टैक्स की दर तय की जाती है।
अगर आप सैलरीड एम्प्लाई हैं, तो आपकी कंपनी आपकी सैलरी में से तय टैक्स का कुछ हिस्सा पहले ही काट सकती है। इसे टीडीएस TDS कहते हैं।
आखिर में आता है आईटीआर ये एक तरह की रिपोर्ट है, जिसमें आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को अपनी कुल कमाई, मिलने वाली छूट यानी Deductions और वित्तीय वर्ष में भरे गए टैक्स का पूरा हिसाब देते हैं और अगर पता चलता है कि आपसे ज़रूरत से ज़्यादा टैक्स काट लिया गया है, तो आपको उसका रिफंड भी वापस मिल जाता है।