
अंजली तोमर, नईदुनिया, भोपाल। पहले जहां शादी के लिए 22 कैरेट सोने की भारी ज्वेलरी को प्राथमिकता दी जाती थी, वहीं अब ग्राहक कम वजन और कम कैरेट की ज्वेलरी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
भोपाल के ज्वेलरी बाजार में शादी के सीजन की तुलना में ऑफ सीजन में कारोबार करीब 60 प्रतिशत तक घटा, लेकिन तीजा, संतान सप्तमी, ऋषि पंचमी और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों के साथ मांग फिर बढ़ने लगी है।
शादी सीजन में 3-4 हजार करोड़ का कारोबार कैट (कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) 12 शहरों का सैंपल सर्वे करके एमपी का आंकड़ा जारी करता है। उसी से भोपाल का अंदाजा लगाया जाता है कि नवंबर-दिसंबर 2024-25 के शादी सीजन में मध्यप्रदेश में 1 नवंबर से 14 दिसंबर के बीच करीब 1.85 लाख शादियां हुई थीं। इनसे प्रदेश में 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबार का अनुमान लगाया गया था। इसमें करीब 20 प्रतिशत यानी 6 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्री-बुकिंग से ही हो गया था।
इसका बड़ा हिस्सा सोने-चांदी की खरीदारी से जुड़ा था। भोपाल में इसी शादी सीजन में ज्वेलरी सहित कुल शादी कारोबार का अनुमान 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये के बीच रहा। इसके मुकाबले आफ सीजन में कारोबार घटकर करीब 500 से 700 करोड़ रुपये रह गया। यानी शादी के मुकाबले आफ सीजन में बाजार काफी कमजोर रहा।
व्यापारियों के अनुसार तीजा, संतान सप्तमी, ऋषि पंचमी और गणेश चतुर्थी के दौरान ज्वेलरी की मांग में आफ सीजन के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। वहीं इस साल त्योहारी कारोबार पिछले साल की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। भोपाल में अकेले धनतेरस पर 600 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है।
22 कैरेट की भारी ज्वेलरी के बजाय अब 9, 14, 18 और 20 कैरेट की हल्की ज्वेलरी की मांग बढ़ी है। इनकी हिस्सेदारी 40 से बढ़कर 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ग्राहक प्लेन डिजाइन पसंद कर रहे हैं। पहले तीन ग्राम की अंगूठी बनती थी, अब 500 मिलीग्राम तक की अंगूठी बन रही है। शादी में भी भारी सेट के बजाय कम वजन में अधिक डिजाइन खरीदे जा रहे हैं।
पंकज सोनी, सराफा कारोबारी का कहना है कि आगे शादी सीजन में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। उन्होनें बोला शादी सीजन में पिछले साल की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।
योगेश सोनी, सराफा कारोबारी का कहना है कि ग्राहकों की खरीदारी पूरी तरह बंद नहीं हुई है, बल्कि महंगे सोने के कारण बजट, वजन, कैरेट और डिजाइन बदल गए हैं। यानी बाजार में मांग बनी हुई है, लेकिन अब ग्राहक पहले की तुलना में कीमत को ज्यादा ध्यान में रखकर खरीदारी कर रहा है।