
बिजनेस डेस्क। भारत सरकार ने कच्चे तेल के महंगे आयात पर लगाम लगाने और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (CMVR) में संशोधन का एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जो देश में E85 और E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों के लिए रास्ता साफ करेगा। यह निर्णय भारत की पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
अभी तक भारत का ध्यान E20 (20% एथेनॉल) के लक्ष्य को हासिल करने पर था, लेकिन नए प्रस्ताव के साथ सरकार अब वैश्विक मानकों की ओर बढ़ रही है।
शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल का उत्पादन काफी किफायती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि E100 ईंधन की कीमत 60 से 70 रुपये प्रति लीटर के बीच रह सकती है। यदि यह प्रभावी रूप से लागू होता है, तो वाहन चलाने की लागत में भारी कमी आएगी।
भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का अपना पिछला लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। अब अगले चरण की ओर बढ़ने के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं:
हायर एथेनॉल ब्लेंडिंग (High Ethanol Blending) का सफल क्रियान्वयन फ्लेक्स-फ्यूल इंजन (Flex-Fuel Engines) पर निर्भर करेगा। ये विशेष रूप से डिजाइन किए गए इंजन होते हैं जो अलग-अलग मात्रा में एथेनॉल और पेट्रोल के मिश्रण पर बिना किसी तकनीकी खराबी के चल सकते हैं।
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सरकार ने इस मसौदे पर आम जनता और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण के बाद इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा, जिससे भारत वैश्विक बायोफ्यूल बाजार में एक अग्रणी शक्ति के रूप में उभरेगा।