
बिजनेस डेस्क। पिछले साल जीएसटी में कटौती के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों पर मिली राहत अब खत्म होती दिख रही है। अप्रैल के अंत तक एयर कंडीशनर (AC), रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, टेलीविजन और स्मार्टफोन जैसे उत्पादों की कीमतों में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी होने जा रही है।
कच्चे तेल से बने प्लास्टिक डेरिवेटिव और मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत के कारण कंपनियां लगातार तीसरी बार दाम बढ़ाने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और बाजार की मांग भी प्रभावित हो सकती है।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू उपकरणों और टीवी की कीमतों में 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं स्मार्टफोन और मोबाइल की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक का उछाल संभव है। लैपटॉप की कीमतें भी 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। लगातार बढ़ती कीमतों से ग्राहकों की खरीदारी पर असर पड़ने की आशंका है।
ब्लू स्टार के प्रबंध निदेशक बी. त्यागराजन के मुताबिक हाल ही में 6 प्रतिशत कीमत बढ़ाने के बाद कंपनी जल्द ही 6-7 प्रतिशत और बढ़ोतरी कर सकती है। वहीं हायर इंडिया के अध्यक्ष सतीश एनएस ने बताया कि 21 अप्रैल से सभी उत्पादों पर 4 से 7 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाने की तैयारी है। टीवी कंपनियां भी अगले महीने तक 6-8 प्रतिशत तक दाम बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
जनवरी-फरवरी में इनपुट लागत और रुपये की कमजोरी के कारण पहली बढ़ोतरी हुई थी। मार्च-अप्रैल में कच्चे तेल की कीमतों और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से दूसरी बार कीमतें बढ़ीं। अब मेमोरी चिप्स की महंगाई और सप्लाई चेन बाधाओं ने तीसरी बढ़ोतरी की स्थिति बना दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे कंपोनेंट्स के कारण स्मार्टफोन बाजार में गिरावट आ सकती है। अप्रैल से जून के बीच बिक्री में दोहरे अंकों की कमी संभव है। पूरे साल बाजार में करीब 10 प्रतिशत गिरावट का अनुमान जताया जा रहा है।
महंगाई केवल इलेक्ट्रॉनिक्स तक सीमित नहीं है। साबुन और डिटर्जेंट जैसे FMCG उत्पाद भी महंगे हो रहे हैं। पाम ऑयल और पैकेजिंग लागत बढ़ने से कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं या पैकेट का वजन कम कर रही हैं।
लगातार बढ़ती लागत और महंगाई का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। ऐसे में उपभोक्ता खर्च में कटौती कर सकते हैं, जिससे बाजार की मांग पर भी दबाव बनेगा।