बढ़ती मांग, बढ़ती जागरूकता और डिजिटल इनोवेशन के चलते भारत में होम लोन का मार्केट तेज़ी से बदल रहा है, इसके अलावा आजकल होम लोन अफॉर्डेबल भी हो गए हैं। यही कारण है कि प्रापॅर्टी खरीदने में खरीददारों का भरोसा बढ़ रहा है। यहां हम कुछ ऐसे कारकों पर बात करने जा रहे हैं जो इन पहलुओं में योगदान दे रहे हैं।
सरकार की इनीशिएटिव ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ के चलते अफॉर्डेबल हाउसिंग सेगमेन्ट लगातार विकसित हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लो एवं मिडल इंकम सेगमेन्ट में लाखों घरों के लिए मंज़ूरी दी गई है। उम्मीद है कि अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर जीएसटी रेट कम होने और इंटरेस्ट रेट में छूट के कारण वित्तीय वर्ष 25 के अंत तक अफॉर्डेबल होम लोन की मांग और अधिक बढ़ेगी।
अतुल मोंगा- सीईओ एवं सह-संस्थापक, बेसिक होम लोन अनुसार टेक्नोलॉजी ने होम लोन के मार्केट को पूरी तरह से बदल दिया है। एआई-आई से असेसमेन्ट, पेपरलैस डॉक्युमेंटेशन और कुछ ही दिनों में लोन वितरण आजकल आम बात हो गई है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का फिनटेक सेक्टर 30 फीसदी की रेट से बढ़कर 2032 तक 990 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। ऐप से लोन ट्रैकिंग एवं इंस्टेन्ट अप्रूवल की वजह से पूरी प्रक्रिया, तेज़, आसान, पारदर्शी और यूज़र-फ्रैंडली हो गई है और उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव मिल रहा है।
रूरल एवं सेमी-अरबन इलाकों में उपभोक्ता फाइनैंशियल मामलों को बेहतर समझने लगे हैं, आज बड़ी संख्या में उपभोक्ता होम लोन की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा फाइनैंशियल इंस्टीटयूशन्स भी मॉर्गेज एवं क्रेडिट लेंडिंग के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए वेबिनार, वर्कशॉप एवं कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्रामों का आयोजन करते हैं। अतुल मोंगा- सीईओ एवं सह-संस्थापक, बेसिक होम लोन के अनुसार सोशल मीडिया एवं मोबाइल ऐप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसमें योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले समय में हाउसिंग सेक्टर के विकास में और तेज़ी आएगी।
आजकल होम लोन आसानी से मिलने लगा है। उपभोक्ताओं को हाम लोन पर कई तरह के फायदे भी मिलते हैं जैसे टैक्स के फायदे, महिलाओं के लिए विशेष छूट, कुछ रेज़िडेन्शियल प्रोजेक्ट्स पर सब्सिडी। लोन देने वाले बैंकों, माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशन्स एवं क्रेडिट युनियन के प्रयासों के चलते ही यह संभव हो पाया है। अतुल मोंगा- सीईओ एवं सह-संस्थापक, बेसिक होम लोन के अनुसार इसके अलावा एआई और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी भी डेटा को एनालाइज़ कर कस्टमाइज़्ड लोन देने में मदद करती है।
आज के उपभोक्ता पर्यावरण के बारे में भी ज़्यादा सजग हो गए हैं, जिसके चलते ग्रीन हाउसिंग लोन की मांग बढ़ी है। यही कारण है कि बैंक और फाइनैंशियल इंस्टीट्यूट ग्रीन होम लोन पर छूट देते हैं। अतुल मोंगा- सीईओ एवं सह-संस्थापक, बेसिक होम लोन के अनुसार सरकार भी ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेट के लिए मेंडेट जैसे प्रयासों के द्वारा सस्टेनेबल डेवलपमेन्ट को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में होम लोन सेक्टर में इनोवेशन को गति मिल रही है।