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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 14, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ICICI Bank का यू-टर्न... मिनिमम बैलेंस की लिमिट 50 हजार रुपये से की कम, अब खाते में जमा करने होंगे इतने पैसे

ICICI बैंक ने ग्राहकों की प्रतिक्रिया के बाद शहरी क्षेत्रों में नए बचत खातों के लिए न्यूनतम औसत बैलेंस 50,000 रुपये से घटाकर 15,000 रुपये कर दिया। अर्...और पढ़ें

By Anurag MishraEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Thu, 14 Aug 2025 10:23:15 AM (IST)Updated Date: Thu, 14 Aug 2025 10:23:15 AM (IST)
ICICI Bank का यू-टर्न... मिनिमम बैलेंस की लिमिट 50 हजार रुपये से की कम, अब खाते में जमा करने होंगे इतने पैसे
आईसीआईसीआई बैंक ने ग्राहकों की तीखी प्रतिक्रिया के बाद बदला फैसला। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. शहरी MAB घटाकर 50,000 से 15,000 रुपये किया गया।
  2. अर्ध-शहरी क्षेत्रों में MAB अब 7,500 रुपये तय।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में MAB घटकर 2,500 रुपये हो गया।

बिजनेस डेस्क, इंदौर। आईसीआईसीआई बैंक ने बुधवार को शहरी क्षेत्रों के नए ग्राहकों के लिए न्यूनतम औसत बैलेंस (MAB) की शर्त 50 हजार रुपये से घटाकर 15 हजार रुपये कर दी है। यह फैसला ग्राहकों से मिली तीखी प्रतिक्रिया के बाद लिया गया है। इससे पहले बैंक ने 1 अगस्त 2025 से नए बचत खातों के लिए मेट्रो शहरों में MAB को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया था, जिसके बाद विवाद खड़ा हुआ था।

अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी राहत

बैंक ने अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए MAB को 25,000 रुपये से घटाकर 7,500 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 10,000 रुपये से घटाकर 2,500 रुपये कर दिया है। इसके साथ ही बैंक ने स्पष्ट किया कि 1,200 चयनित संस्थानों के छात्र और 60 वर्ष से कम आयु के पेंशनभोगियों पर यह शर्त लागू नहीं होगी।


ग्राहकों की आलोचना के बाद बदलाव

बैंक के अनुसार यह बदलाव ग्राहकों से मिले मूल्यवान सुझावों के बाद किए गए हैं। बैंक ने कहा कि हमने 1 अगस्त से नए बचत खातों के लिए MAB की नई आवश्यकताएं लागू की थीं। ग्राहकों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए इन्हें संशोधित किया गया है।

नागरिक संगठन ने जताई थी आपत्ति

इससे पहले 11 अगस्त को ‘बैंक बचाओ देश बचाओ मंच’ नामक नागरिक संगठन ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर बैंक के निर्णय पर आपत्ति जताई थी। मंच ने इसे “अन्यायपूर्ण और प्रतिगामी” बताते हुए कहा था कि यह समावेशी बैंकिंग की भावना के विपरीत है। यह फैसला सरकार के समावेशी विकास के दृष्टिकोण को कमजोर करता है।