
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। 83 साल की दादी सिर्फ अपने बहू से नहीं बल्कि पोती से भी हर महीने 15000 खर्च के लिए मांगती थीं।
83 साल की एस. थैंकम्मा केरल सरकार के फिशरीज डिपार्टमेंट (Fisheries Department) से रिटायर हुई हैं और खुद पेंशन उठाती हैं। उनके पति भी फिशरीज डिपार्टमेंट में सीनियर अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें भी पेंशन मिलती है। थैंकम्मा के बेटे टी राज कुमार की नौकरी के दौरान मौत हो गई थी। वह केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड यानी KSEB में सीनियर सुप्रीटेंडेट थे।
उसकी मौत के बाद उनकी पत्नी को विधवा फैमिली पेंशन मिलने लगी और उनकी बेटी यानी थैंकम्मा की पोती कॉलेज में पढ़ाई कर रही है।
दादी ने पोती और बहू दोनों के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बेटे की मौत के बाद उसकी पत्नी को मिल रही फैमिली पेंशन में दादी ने अपना हिस्सा मांगा और अपनी पोती से हर महीने 15,000 रुपये खर्चे के लिए भी मांगे।
बेटे की मौत के बाद मिलने वाले सर्विस बेनेफिट में से करीब 12.28 लाख रुपये दादी को पहले ही मिल चुके थे। ये रकम KSEB ने सीधे उन्हें दिये थे, जबकि बाकी रकम बेटे की पत्नी को मिले थे।
फैमिली पेंशन में हिस्सा के मांग पर कोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटीजन एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर दादी को बेटे की विधवा को मिल रही फैमिली पेंशन का हिस्सा दिलाया जा सके।
कोर्ट ने कहा कि पोती अभी कॉलेज की छात्रा है। वह अपनी पढ़ाई के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से एजुकेशन लोन लेकर पढ़ रही है। ऐसे में उससे दादी का पैसे की मांग करना उचित नहीं है।
दादी की ओर से दलील दी गई थी कि सीनियिर सिटीजन एक्ट के तहत पोती को उनकी देखभाल करनी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इसे साफ इनकार करते हुए कहा कि पढ़ाई कर रही पोती पर ऐसी आर्थिक जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा। खासकर, तब जब वो खुद एजुकेशन लोन के सहारे पढ़ाई कर रही है।
कोर्ट ने दोनों मांगों को खारिज कर दिया।