
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर पैसों की तंगी और निजी साहूकारों के भारी-भरकम ब्याज दर के जाल में फंसकर देश के किसानों का सपना टूट जाता है। किसानों की इस परेशानी को हमेशा के लिए समाप्त करने और उन्हें आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण योजना लेकर आई है। सरकार ने 'किसान क्रेडिट कार्ड' (KCC Scheme 2026) योजना (PM Kisan Credit Card) का न केवल दायरा बढ़ाया है, बल्कि इसकी लोन लिमिट में भी बंपर बढ़ोतरी की है।
केंद्र सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC Eligibility) योजना को एक नया रूप प्रदान किया है। अब यह योजना केवल धान, गेहूं या पारंपरिक खेती तक ही सीमित नहीं है।
वित्त मंत्रालय की ताजा घोषणा के अनुसार, अब पशुपालन, मछली पालन, डेयरी, बकरी पालन और सूअर पालन जैसे कृषि से जुड़े अन्य व्यवसायों के लिए भी केसीसी के माध्यम से लोन प्राप्त किया जा सकता है। सरकार की इस पहल का सीधा उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय के नए स्रोत खोलना है, ताकि वे केवल एक फसल पर निर्भर न रहें और प्राइवेट सूदखोरों के महंगे कर्ज से बचे रहें।
खेती-किसानी की बढ़ती लागत और आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने केसीसी (KCC Interest Rate) की ऋण सीमा को बढ़ा दिया है। बजट 2025-26 में वित्त मंत्री के ऐलान के बाद, अब केसीसी की लिमिट 3 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 5 लाख रुपये कर दी गई है। इस बढ़ी हुई राशि से किसान अपनी खेती के लिए बेहतर गुणवत्ता के बीज, खाद और आधुनिक मशीनें खरीद सकेंगे। इसके अतिरिक्त, फसल कटने के बाद उसके सुरक्षित भंडारण या पशुपालन के व्यवसाय को बढ़ाने के लिए भी इस 5 लाख रुपये के फंड का उपयोग किया जा सकता है।
बैंक से लोन लेते समय छोटे और सीमांत किसानों के सामने सबसे बड़ी अड़चन किसी संपत्ति को गिरवी रखने की आती है। इस समस्या को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब बिना कोई जमीन या संपत्ति गिरवी रखे लोन लेने की सीमा 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 2 लाख रुपये कर दी गई है। मंत्रालय और नाबार्ड का मानना है कि इस कदम से देश के उन लाखों छोटे किसानों को राहत मिलेगी, जिनके पास बैंक में गारंटी देने के लिए संपत्ति नहीं होती।
इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी बेहद सस्ती ब्याज दरें हैं। सामान्य तौर पर किसान क्रेडिट कार्ड से लिए गए शॉर्ट-टर्म लोन पर सालाना 7 प्रतिशत की दर से ब्याज लगता है। लेकिन समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को केंद्र सरकार 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट देती है। यानी, अगर किसान समय पर भुगतान करता है, तो उसे यह लोन सिर्फ 4 प्रतिशत की मामूली ब्याज दर पर उपलब्ध हो जाता है।
केसीसी बनवाना अब पहले से कहीं अधिक सरल हो गया है। जिन किसानों के नाम पर जमीन है, वे तो इसके पात्र हैं ही, साथ ही बटाईदार किसान और महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHGs) भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन किसी भी पास के सरकारी, ग्रामीण या को-ऑपरेटिव बैंक में जाकर फॉर्म भरकर किया जा सकता है। इसके अलावा, 'जन समर्थ पोर्टल' और 'किसान ऋण पोर्टल' के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है।
आवेदन के लिए केवल पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड और पैन कार्ड की आवश्यकता होगी। खेती के लोन के लिए जमीन की पासबुक और बैंक खाते का विवरण देना होगा। वहीं, पशुपालन या मछली पालन के लिए संबंधित स्थान का विवरण या लाइसेंस जमा करना होगा। वर्तमान में देश भर में 450 से अधिक बैंक किसानों को यह कार्ड जारी कर रहे हैं।
केसीसी के तहत स्वीकृत की गई लिमिट 5 साल के लिए मान्य होती है। इसमें हर महीने ईएमआई (EMI) देने की बाध्यता नहीं होती; किसान अपनी फसल बिकने के बाद एकमुश्त राशि जमा कर सकते हैं। सूखा या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आरबीआई के नियमों के तहत किसानों को ब्याज में छूट दी जाती है और लोन चुकाने की समय-सीमा बढ़ा दी जाती है।