
बिजनेस डेस्क। मध्य प्रदेश ने 1 नवंबर 2026 को अपने गठन के 70 साल पूरे कर लिए हैं। 1956 में जब नया मध्य प्रदेश बना था, तब हालात ऐसे थे कि पूरी अर्थव्यवस्था सिर्फ खेती के भरोसे थी। न ढंग की सड़कें थीं, न बिजली और न ही फैक्ट्रियां। लेकिन बीते सात दशकों में तस्वीर पूरी तरह पलट चुकी है।
कभी पाई-पाई और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसने वाला यह राज्य आज ₹18.48 लाख करोड़ से ज्यादा की अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। आइए समझते हैं कि पहले बजट से लेकर अब तक यह बड़ा बदलाव कैसे आया।
पहला बजट: 1 नवंबर 1956 को राज्य बनने के करीब डेढ़ महीने बाद, 19 दिसंबर 1956 को विधानसभा में पहला बजट रखा गया था।
किसने पेश किया: तत्कालीन वित्त मंत्री भगवंत राव अन्नाभाऊ मंडलोई ने इसे पेश किया था। पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल के निधन के कारण वे उस समय कार्यवाहक मुख्यमंत्री भी थे। हालांकि, पहले बजट की कुल रकम का कोई पुख्ता सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
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खेती पर निर्भरता: योजना आयोग की 1957-58 की रिपोर्ट के मुताबिक, तब राज्य की 2.61 करोड़ की आबादी में से करीब 2.04 करोड़ लोग (78%) सिर्फ खेती पर निर्भर थे।
सूखे खेत: करीब 3.82 करोड़ एकड़ बोई गई जमीन में से सिर्फ 21 लाख एकड़ यानी महज 5.49% हिस्से में ही सिंचाई की सुविधा थी, जबकि देश का औसत तब 17% था।
टूटी सड़कें: उस समय पूरे राज्य में कच्ची-पक्की सड़कों का कुल जाल सिर्फ 17,608 मील का ही था।
1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना, तो एमपी की खदानें और बड़े खनिज संसाधन दूसरे राज्य में चले गए। इसके बाद मध्य प्रदेश ने अपनी बची हुई जमीन और पानी के दम पर खेती को मजबूत किया। गेहूं और सोयाबीन में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ और इंदौर, पीथमपुर, भोपाल, देवास व मंडीदीप जैसे शहर बड़े इंडस्ट्रियल हब बन गए।
GSDP में बंपर उछाल: आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था ₹16.69 लाख करोड़ की थी, जो 2026-27 के बजट में ₹18.48 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।
सालाना बजट: सरकार का सालाना खर्च और बजट अब ₹4.23 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है।
बढ़ी लोगों की कमाई: 2011-12 में जहां एक व्यक्ति की सालाना औसत आय सिर्फ ₹38,497 थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर ₹1,69,050 हो गई है।
आज भी राज्य की कमाई में सबसे बड़ा हिस्सा खेती और किसानी (43.09%) का है। इसके बाद 37.12% सर्विस सेक्टर और 19.79% हिस्सा उद्योगों से आता है। 70 साल में एमपी ने लंबा सफर तय किया है।