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Mustard Oil Price Hike: ग्वालियर-चंबल में सरसों की कमी, 190 रुपये किलो पहुंचा तेल

ग्वालियर-चंबल में सरसों उत्पादन घटने और मांग बढ़ने से सरसों तेल 170-190 रुपये किलो बिक रहा है। कारोबारियों के अनुसार सरसों के भाव 9000 रुपये प्रति क्व...और पढ़ें

By Anil TomarEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Thu, 11 Jun 2026 08:51:47 AM (IST)Updated Date: Thu, 11 Jun 2026 08:51:47 AM (IST)
Mustard Oil Price Hike: ग्वालियर-चंबल में सरसों की कमी, 190 रुपये किलो पहुंचा तेल
मस्टर्ड ऑयल इस बार लोगों को महंगा ही खरीदना पड़ेगा। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. सरसों तेल 170 से 190 रुपये किलो तक पहुंचा।
  2. उत्पादन घटने से बाजार में सरसों की कमी बनी।
  3. सरसों में तेल की मात्रा पांच प्रतिशत तक घटी।

अनिल तोमर, नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अंचल सहित उत्तर भारत के हर घर की रसोई में उपयोग होने वाला सरसों का तेल यानि मस्टर्ड ऑयल इस बार लोगों को महंगा ही खरीदना पड़ेगा। क्योंकि सरसों की आपूर्ति कम है और मांग अधिक है। वर्तमान में खुला और पैक्ड सरसों का तेल बाजार में 170 रुपये से लेकर 190 रुपये प्रति किलो के ऊंचे भाव पर बिक रहा है। तेल महंगा होने का सीधा असर आम आदमी के बजट पर पड़ता है।

तेल कारोबार से जुड़े लोगों ने कहा कि आगामी समय में और सरसों व तेल के भाव और बढ़ सकते हैं। ग्वालियर-चंबल को सरसों यानि "पीले सोने" की खान कहा जाता है। लेकिन पिछले तीन सालों से मौसमी गतिविधियों के चलते इसके उत्पादन में कमी आई है। वहीं सरसों तेल की डिमांड बढ़ने से उसके भाव लगातार बढ़ रहे हैं।


पश्चिम एशिया में तनाव के चलते दूसरे देशों से आयल की आवक भी प्रभावित हुई है। ग्वालियर चंबल संभाग में 100 से अधिक बड़े आयल प्लांटों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में कुछ छोटे प्लांट हैं। जिनके संचालक सीधी किसानों से सरसों खरीद लेते हैं। कई बार उनकी आपसी प्रतिस्पर्धा से सरसों कीमतें बढ़ जाती हैं। बड़े प्लांटों को बमुश्किल सरसों मिल पाता है।

तेल की मात्रा कम और नेफेड ने नहीं खरीदी सरसों

  • तेल कारोबार से जुड़े नवल अग्रवाल के मुताबिक इस बार सरसों की पैदावार तो हुई है, लेकिन उसमें तेल की मात्रा पांच से छह प्रतिशत कम है। सामान्य तौर पर सरसों में 41 से 42 प्रतिशत तेल निकलता है। अच्छी गुणवत्ता वाली सरसों में यह आंकड़ा 45 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। लेकिन इस बार की सरसों में 37 से 38 प्रतिशत तेल ही निकल रहा है।

  • सरसों व्यवसायी रवि गुप्ता ने कहा कि सरसों की खरीद और स्टाक हमेशा सरकारी संस्था नेफेड करती थी। बाद में वह प्लांट संचालकों को बेचती थी। लेकिन इस बार नेफेड ने खरीद नहीं की। कारोबारियों ने ही खरीदकर स्टॉक कर लिया, जो अब मनमानी कीमत पर बेच रहे हैं।
  • और बढ़ सकता है समर्थन मूल्य

    बता दें कि जिस सरसों का समर्थन मूल्य पर 62 सौ रुपये क्विंटल था, वह आज 7700-7800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है। आगामी समय में यह कीमतें 9 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती हैं।

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