
बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव निवेश का हिस्सा है। जब बाजार तेजी से गिरता है, तो निवेशकों के मन में डर पैदा होना स्वाभाविक है। कई लोग नुकसान के डर से जल्दबाजी में शेयर बेच देते हैं, जबकि कुछ दूसरे निवेशक गिरावट देखकर बिना सोचे-समझे पैसा लगाने लगते हैं।
दोनों ही स्थितियों में भावनाओं के बजाय समझदारी से फैसला लेना जरूरी है। गिरते बाजार में सबसे पहले अपनी निवेश रणनीति की समीक्षा करें।
यह समझें कि बाजार में गिरावट वैश्विक परिस्थितियों, आर्थिक सुस्ती, ब्याज दरों या कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन के कारण आई है। यदि आपके निवेश की बुनियाद मजबूत है और लक्ष्य लंबी अवधि के हैं, तो केवल बाजार में गिरावट देखकर फैसला बदलना उचित नहीं है।

हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं है कि हर शेयर को लंबे समय तक पकड़े रहना चाहिए। जिन कंपनियों के कारोबार, मुनाफे या वित्तीय स्थिति में लगातार गिरावट आ रही है, उनके निवेश की समीक्षा जरूरी है।
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को भी अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि का ध्यान रखना चाहिए। निवेश में अनुशासन बनाए रखना सबसे अहम है।
आपातकालीन जरूरतों के लिए अलग से धन रखें और बाजार में गिरावट के दौरान उधार लेकर निवेश करने से बचें। एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार चरणबद्ध निवेश का विकल्प चुन सकते हैं।
याद रखें, बाजार की हर गिरावट खरीदारी का अवसर नहीं होती और हर तेजी मुनाफे की गारंटी नहीं देती। सही जानकारी, धैर्य और दीर्घकालीन नजरिया ही निवेशक की असली ताकत हैं। बाजार गिरने पर घबराने के बजाय तथ्यों को समझें और सोच-समझकर कदम उठाएं।