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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। काफी समय से लोगों को NSE के IPO का इंतजार था, आखिरकार आज ये निवेशकों के लिए खुल गया। एनएसई का आईपीओ आज 17 सिंतबर को निवेशकों के लिए खुल गया है और 24 सितंबर को बंद हो जाएगी।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी NSE IPO के शेयर का प्राइस बैंड 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। कल 16 सितंबर को कंपनी ने कई एंकर निवेशकों से 6,746.2 करोड़ रुपये भी जुटाए हैं। कंपनी सर्कुलर के मुताबिक, एक्सचेंज ने एंकर इन्वेस्टर्स को 1,785 रुपये प्रति शेयर की दर से 3,77,93,739 इक्विटी शेयर आवंटित किए थे। बता दें कि एंकर बुक में 98 म्यूचुअल फंड स्कीम्स और 27 लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां शामिल थीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी NSE का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹160 से ₹170 प्रति शेयर के बीच है।
हर लॉट में 8 शेयर हैं, इसका मतलब रिटेल निवेशकों को एक लॉट के लिए ऊपरी प्राइस बैंड पर कम से कम ₹14,280 का निवेश करना होगा। इसके बाद बोली लगाई जा सकती है।
कुल इश्यू का 35% रिटेल निवेशकों को मिलेगा, 50% क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए रखा गया है और बाकी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) के लिए आरक्षित है।
एंजेल वन ने सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। जियोजीत ने भी मीडियम-टू-लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए "सब्सक्राइब" रेटिंग दी है। जबकि रेलीगेयर ने ट्रेडिंग एक्टिविटी और वैल्यूएशन से जुड़े जोखिमों के बीच संतुलन का हवाला देते हुए IPO पर "न्यूट्रल" रुख अपनाया है।
हर निवेशकों को पैसे लगाने से पहले कुछ चीजें अच्छे से समझ लेनी चाहिए। NSE की कमाई शेयर बाजार में होने वाली ट्रेडिंग और उसके वॉल्यूम पर निर्भर करती है और NSE की करीब 79% आय ट्रांजैक्शन चार्ज से आती है। ऐसे में अगर बाजार में ट्रेडिंग गतिविधि या ट्रेडिंग वॉल्यूम में उतार-चढ़ाव हुआ, तो इसका सीधा असर NSE की कमाई पर पड़ेगा।
आज कल ऑप्शंस ट्रेडिंग शेयर बाजार में ट्रेडिंग का एक अहम हिस्सा बन गया है। हालांकि, ज्यादा सट्टेबाजी वाली ट्रेडिंग को कम करने के लिए रेगुलेटर्स ने कुछ कदम उठाए है। इसलिए निवेशकों को ये मान के नहीं चलना चाहिए कि डेरिवेटिव्स में तेजी के दौरान NSE ने जिस ग्रोथ का अनुभव किया था, वह आगे भी वैसा रहेगा।
NSE की रेगुलेशन काफी सख्त है, इसमें SEBI जैसे रेगुलेटर्स की निगरानी रहती है. अगर आप नियमों का पालन नहीं करते है तो कार्रवाई भी हो सकती है. बता दें कि NSE के इंटरनेशनल कारोबार से जुड़े मामलों में IFSCA निगरानी करता है.