_m.webp)
बिजनेस डेस्क। बीते दो-तीन सालों में सोना काफी महंगा हुआ है, लेकिन हीरा अब पॉकेट फ्रेंडली बन चुका है। कभी केवल रईसों की शान माना जाने वाला हीरा अब मध्यम वर्ग की पहली पसंद बन रहा है। महंगे होते सोने के बीच डायमंड ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ी है। प्राकृतिक हीरे और सोने के गहनों के मुकाबले बमुश्किल आधी कीमत में हीरे से जड़े आभूषण मिल रहे हैं। इसका मुख्य कारण लैब ग्रोन डायमंड (एलजीडी) है। इस दिवाली और आगामी वैवाहिक सीजन में इन गहनों की मांग लगातार बढ़ रही है।
दस-बारह साल पहले इंदौर में सिर्फ हीरे के गहने बेचने वाले एकाध शोरूम ही थे, लेकिन पिछले दो वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर करीब 50 हो गई है। सराफा व्यापारी निलेश सारडा के अनुसार, पहले दुनिया में हीरों के खनन और आपूर्ति पर एक-दो कंपनियों का एकाधिकार था, जिससे दाम ऊंचे बने रहते थे। बीते वर्षों में लैब ग्रोन डायमंड का उत्पादन बढ़ने से आपूर्ति सुधरी है और पांच साल में हीरे के दाम करीब आधे हो गए हैं।
इंदौर चांदी-सोना-जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन के मंत्री बसंत सोनी के मुताबिक, प्राकृतिक हीरे और लैब ग्रोन डायमंड की चमक, मजबूती या गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं होता है। प्राकृतिक हीरा जमीन के भीतर तेज गर्मी और दबाव से बनने में सैकड़ों साल लेता है, जबकि लैब ग्रोन डायमंड आधुनिक लैब में कुछ ही हफ्तों में तैयार हो जाता है। यही वजह है कि इसकी कीमत प्राकृतिक हीरे से 70 प्रतिशत तक कम होती है।
सराफा व्यवसायी अविनाश शास्त्री बताते हैं कि हीरा सबसे कठोर तत्व होने के कारण इसकी ज्वेलरी शुद्ध सोने के बजाय चांदी, प्लेटिनम या अन्य मिश्रित धातुओं के साथ सिल्वर फिनिश में बनाई जाती है। इससे मेकिंग खर्च भी घट जाता है। भारत में अब 25 से अधिक बड़े ब्रांड्स सिर्फ लैब ग्रोन डायमंड ज्वेलरी बेच रहे हैं। पहले जो प्राकृतिक एक कैरेट का हीरा 3 लाख रुपये में मिलता था, अब एक लाख रुपये में लैब ग्रोन हीरा उपलब्ध है। इसमें सबसे ज्यादा मांग इंगेजमेंट रिंग की देखी जा रही है।