
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक चली, जिसमें रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) बढ़ाने का फैसला लिया गया है। अब रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। कई सालों बाद अब लोगों की लोन EMI बढ़ने वाली है।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के फैसलों की घोषणा करते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया की आर्थिक स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इन चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और देश की आर्थिक गतिविधियों में अच्छी रफ्तार देखने को मिल रही है।
संजय मल्होत्रा ने आंकड़ों को देखते हुए कहा कि महंगाई की स्थिति पिछले साल जितनी अनुकूल नहीं है। RBI के अनुमान के अनुसार, अगली तीन तिमाहियों में खुदरा महंगाई औसतन करीब 5.8 प्रतिशत रह सकती है। वहीं इस वित्त वर्ष में कोर महंगाई करीब 4.94 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए RBI अब ब्याज दरों में कटौती करने के पक्ष में नहीं है। गवर्नर ने साफ संकेत दिया कि आने वाले समय में तुरंत ब्याज दर में कटौती की कोई संभावना नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर महंगाई का दबाव बढ़ता है और कीमतों में बढ़ोतरी का असर ज्यादा क्षेत्रों में दिखाई देता है, तो RBI ब्याज दर और बढ़ाने पर विचार कर सकता है। वहीं अगर स्थिति नियंत्रण में रहती है, तो रेपो रेट को स्थिर रखा जा सकता है।
यह भी पढ़ें- RBI Repo Rate Hike: 5.25% से बढ़कर 5.50% हुआ रेपो रेट, जानिए हर महीने जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ
RBI गवर्नर ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि महंगाई और लागत बढ़ने के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां अच्छी बनी हुई हैं। दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों PMI विस्तार के स्तर पर रहे हैं।
इसके साथ ही लोगों का निजी खर्च भी काफी हद तक मजबूत बना हुआ है और निवेश भी मजबूत बना हुआ है।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में कमजोरी भी देखने को मिली है, जिनमें रोजमर्रा की गैर-जरूरी वस्तुओं की मांग और घरेलू हवाई यात्री यातायात शामिल हैं।