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बिजनेस डेस्क। देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा का सारा विवाद टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर हो रहा है। अब इसी घमासान के बीच टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच 25 अक्टूबर को मुंबई में एक सीक्रेट मीटिंग हुई थी।
इस बैठक का मकसद दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर करना था, लेकिन इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक की व्यवस्था टाटा ग्रुप के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एनए सूनावाला ने की थी। इस बैठक में टाटा संस की लिस्टिंग, शापूरजी पालोनजी (एसपी) ग्रुप की हिस्सेदारी खरीदने और चंद्रशेखरन के कार्यकाल जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
नोएल टाटा ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि टाटा संस को प्राइवेट कंपनी के रूप में ही रहना चाहिए। इसके साथ ही शापूरजी पालोनजी ग्रुप की टाटा संस में मौजूद 18.4% हिस्सेदारी के एक हिस्से को बेचकर करीब 25,000 करोड़ रुपये जुटाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।
टाटा ग्रुप में विवाद की बड़ी वजह एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर है। 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 से अगले पांच साल के लिए चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस फैसले के खिलाफ नोएल टाटा ने असहमति जताई। उनका कहना है कि ग्रुप की नीति के अनुसार 65 साल की उम्र में चेयरमैन को रिटायर हो जाना चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में उन्होंने इस मुद्दे को फिर से उठाया और संकेत दिया कि विवाद नहीं सुलझने पर वह कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।