
बिजनेस डेस्क, नईदुनिया। जीएसटी विभाग लगातार छह माह या उससे अधिक समय तक निल (Nil GST Return) जीएसटी रिटर्न दाखिल करने वाले व्यापारियों पर निगरानी बढ़ा रहा है। विभाग ऐसे मामलों में GST रजिस्ट्रेशन रद करने की कार्रवाई कर रहा है, जहां निल रिटर्न दाखिल किए जाने के बावजूद वास्तविक कारोबारी गतिविधियों की संभावना दिखाई देती है।
विभाग बैंकिंग लेन-देन, ई-वे बिल, ई-इनवाइस और अन्य स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का डेटा एनालिटिक्स के जरिए मिलान कर रहा है। यदि जांच में वास्तविक कारोबार के संकेत मिलते हैं और इसके बावजूद लगातार निल रिटर्न दाखिल किए गए हैं, तो संबंधित व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
कई व्यापारी भविष्य में कारोबार शुरू करने की उम्मीद में लगातार निल रिटर्न भरते रहते हैं। यदि व्यवसाय पूरी तरह बंद हो चुका है, तो समय रहते जीएसटी रजिस्ट्रेशन सरेंडर कराना बेहतर विकल्प माना गया है। वहीं, यदि कारोबार जारी है तो वास्तविक खरीद और बिक्री के आधार पर सही जीएसटी रिटर्न दाखिल करना जरूरी है।
व्यापारियों को नियमित रूप से जीएसटी पोर्टल पर लॉगिन कर विभाग की ओर से जारी नोटिस और आदेशों की जांच करनी चाहिए। यदि नोटिस का समय पर जवाब नहीं दिया जाता, तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद हो सकता है। इससे ई-वे बिल जारी करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने, बैंकिंग और अन्य कारोबारी गतिविधियों में परेशानी आ सकती है।