
बिजनेस डेस्क। भारत में पहली बार घर खरीदने वाले लोगों की उम्र कम हो रही है। लेकिन अपना घर खरीदने के इस सपने को पूरा करने में उनकी मदद करने वाली आर्थिक ताकत अक्सर माता-पिता की हो सकती है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में कई युवा खरीदारों के लिए माता-पिता की आय, क्रेडिट हिस्ट्री और बचत होम लोन पाने में अहम भूमिका निभा सकती है। मिलेनियल्स और Gen Z के बीच घर खरीदने का चलन बढ़ने के साथ, माता-पिता के साथ मिलकर होम लोन लेना (Co-borrowing) युवाओं को कम उम्र में घर खरीदने में मदद करने का एक महत्वपूर्ण तरीका बनकर उभर रहा है।
इस साल की शुरुआत में 7,400 से अधिक मौजूदा और संभावित घर खरीदारों पर किए गए सर्वे में सामने आया कि आवासीय संपत्तियों की खरीद में मिलेनियल्स और Gen Z की हिस्सेदारी लगभग 90-95% है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों से मिली मजबूत भागीदारी इस बात का संकेत है कि घर खरीदने के लिए अब लोग अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और वर्षों का अनुभव जुटाने का इंतजार नहीं कर रहे हैं।
किसी युवा खरीदार की आय स्थिर हो सकती है और उसकी बचत भी बढ़ रही हो सकती है। इसके बावजूद, बैंक और वित्तीय संस्थान होम लोन देने से पहले आय की स्थिरता, मौजूदा कर्ज और किस्त चुकाने की क्षमता का आकलन करते हैं। ऐसे में, माता-पिता की नियमित आय और मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री लोन आवेदन को बेहतर बना सकती है। हालांकि, यह लोन देने वाली संस्था के पात्रता संबंधी नियमों पर निर्भर करता है।
उदाहरण के लिए, 26 साल के किसी युवा की आय और बचत होम लोन के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करने के लिहाज से पर्याप्त नहीं हो सकती। लेकिन यदि माता-पिता में से कोई एक लोन आवेदन में सह-आवेदक के रूप में शामिल होता है, तो परिवार 50 लाख रुपये तक के लोन के लिए पात्र हो सकता है।
हालांकि, लोन की अधिकतम पात्रता के आधार पर पूरी रकम उधार लेना जरूरी नहीं है। बेसिक होम लोन के सीईओ और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि कम रकम का ऐसा लोन, जिसकी EMI आसानी से चुकाई जा सके, युवा खरीदार को भविष्य के लिए बचत करने और दूसरी वित्तीय जिम्मेदारियां निभाने में मदद कर सकता है।
यहां लोन की पात्रता (Eligibility) और उसे चुकाने की वास्तविक क्षमता (Affordability) के बीच अंतर समझना जरूरी है। परिवार की संयुक्त आय और बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल से लोन हासिल करने की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन उधार लेने का फैसला इस आधार पर होना चाहिए कि परिवार लंबे समय तक EMI का भुगतान बिना किसी आर्थिक दबाव के कर सकता है या नहीं।
माता-पिता के साथ मिलकर होम लोन लेने का फैसला करते समय यह समझना जरूरी है कि समय के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती है। 26 या 28 साल की उम्र में किसी युवा का करियर, आय और वित्तीय जिम्मेदारियां अगले दस वर्षों में काफी बदल सकती हैं। दूसरी ओर, लोन में शामिल माता-पिता रिटायरमेंट के करीब हो सकते हैं या उनकी अपनी अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां हो सकती हैं।
इसलिए परिवार को पहले ही कुछ जरूरी बातें स्पष्ट कर लेनी चाहिए। EMI कौन चुकाएगा? दोनों पक्षों का आर्थिक योगदान कितना होगा? युवा खरीदार की आय में बदलाव होने पर किस्तों का भुगतान कैसे किया जाएगा?
इसके अलावा, परिवार को यह भी आकलन करना चाहिए कि ज्यादा डाउन पेमेंट देने या लोन में माता-पिता को शामिल करने से उनकी रिटायरमेंट या अन्य वित्तीय लक्ष्यों के लिए रखी गई बचत पर कितना असर पड़ेगा।
उद्देश्य केवल माता-पिता की मजबूत वित्तीय स्थिति के आधार पर बड़ा लोन हासिल करना नहीं होना चाहिए। बल्कि उनकी मदद से घर खरीदने का सपना इस तरह पूरा करना चाहिए कि किसी भी पीढ़ी पर ऐसा आर्थिक बोझ न पड़े, जिसे संभालना मुश्किल हो।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपना घर खरीदने की आकांक्षा तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, यहां व्यवस्थित हाउसिंग फाइनेंस तक पहुंच और व्यक्तिगत मार्गदर्शन की उपलब्धता अब भी अलग-अलग हो सकती है।
पहली बार घर खरीदने वाला व्यक्ति अक्सर पहली बार विभिन्न लोन विकल्पों, दस्तावेजों, पात्रता की शर्तों और प्रॉपर्टी से जुड़े कागजी कामों को समझने की कोशिश कर रहा होता है। जब माता-पिता और बच्चे एक साथ होम लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो कई लोगों की आय, क्रेडिट हिस्ट्री और EMI चुकाने से जुड़ी अपेक्षाओं को ध्यान में रखना पड़ता है, जिससे प्रक्रिया अधिक जटिल हो सकती है।
बेसिक होम लोन के सीईओ और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए हम इन बाजारों में फाइनेंस सेंटर स्थापित कर रहे हैं। इनका उद्देश्य घर खरीदारों को स्थानीय स्तर पर ऐसा मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, जहां वे लोन देने वाली संस्थाओं के विकल्पों, जरूरी दस्तावेजों और लोन प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझ सकें। इस पहल को हमारा टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और लेंडर नेटवर्क सहयोग देता है।
जब कोई व्यक्ति 15 से 20 साल तक चलने वाली वित्तीय प्रतिबद्धता लेता है, तो सही फैसला करने के लिए भरोसेमंद जानकारी मिलना उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है, जितना लोन तक पहुंच होना।
माता-पिता का अपने बच्चों को पहला घर खरीदने में मदद करना कोई नई बात नहीं है। बदलाव इस बात में है कि युवा भारतीय अब कम उम्र में घर खरीदने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं और इस प्रक्रिया में माता-पिता की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
सही योजना के साथ, माता-पिता के साथ मिलकर होम लोन लेना घर खरीदने के उस फैसले को पहले संभव बना सकता है, जिसे अन्यथा कुछ वर्षों के लिए टालना पड़ता। माता-पिता की स्थापित वित्तीय प्रोफाइल युवा खरीदार को पहले लोन हासिल करने में मदद कर सकती है। वहीं, समय के साथ युवा खरीदार अपनी आय, बचत और लोन चुकाने का रिकॉर्ड मजबूत करके अधिक वित्तीय जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हो सकता है।
असली अवसर इस सहयोग को परिवार पर लंबे समय तक बने रहने वाले वित्तीय बोझ के बजाय स्वतंत्र रूप से घर का मालिक बनने की दिशा में एक कदम बनाने में है।
जब लोन की रकम, EMI चुकाने की योजना और वित्तीय जिम्मेदारियां माता-पिता और युवा खरीदार, दोनों की वास्तविक आर्थिक स्थिति के अनुरूप होती हैं, तो माता-पिता का सहयोग युवाओं को जल्द घर खरीदने में मदद कर सकता है। साथ ही, इससे परिवार की वित्तीय सुरक्षा बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।