
नई दिल्ली। सरकारी बैंकों की सेवाएं मंगलवार को प्रभावित रहीं। नौ बैंक यूनियनों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने विभिन्न मांगों को लेकर एक दिनी हड़ताल का आह्वान किया था।
देशभर में कई स्थानों पर एटीएम खाली रहे। उद्योग चैंबर एसोचैम ने हड़ताल से करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई है।
ऑल इंडिया बैंक इंप्लॉईज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने हड़ताल के सफल रहने का दावा किया। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी बैंकों की शाखाओं ने शटर बंद रखे।
लोग बैंकों में कोई भी लेनदेन नहीं कर सके। जमा व निकासी भी नहीं हो सकी। रिजर्व बैंक के ऑपरेशन चालू रहने के बावजूद क्लिीयरिंग का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ क्योंकि कर्मचारी उपलब्ध नहीं थे।
करूर वैश्य बैंक और फेडरल बैंक जैसे कुछ निजी क्षेत्र के बैंकों ने भी हड़ताल में हिस्सा लिया। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स और नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।
आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और एक्सिस सहित निजी क्षेत्र के ज्यादातर बैंक इससे दूर रहे। देश में सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंक हैं। इनका कुल बैंकिंग कारोबार के 75 फीसद पर नियंत्रण है।
इन मांगों को लेकर हुई स्ट्राइक
- नोटबंदी के दौरान बैंककर्मियों की ओर से अतिरिक्त समय तक दी गई सेवाओं के लिए अलग भुगतान
- फंसे कर्जों की वसूली के लिए कड़े उपाय और शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही
- विलफुल डिफॉल्टरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई
- अगले वेतन संशोधन की जल्द शुरुआत
- सभी काडरों में पर्याप्त रिक्रूटमेंट