
नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक सर्वे पेश किया। सर्वेक्षण में पिछले 12 महीने की आर्थिक स्थिति और विभिन्न विकास कार्यक्रमों की समीक्षा रिपोर्ट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत नजर आ रहे हैं।
इसमें वर्ष 2015-16 में देश की विकास दर 7-7.5 प्रतिशत रही जबकि महंगाई दर 4-4.5 प्रतिशत रही। इसमें वर्ष 2016-17 के लिए जीडीपी की दर को 7-7.75 फीसद आंका गया है।
जेटली के मुताबिक 2013 से अब तक एफडीआई में 22 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। इस सर्वे में अगले पांच साल में विकास दर 8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। वहीं खुदरा महंगाई दर 4 से 4.5 फीसद रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा सर्वे में अर्थव्यवस्था के बेहतर रहने का अनुमान जताया गया है। इसमें रोजगार के बढ़ने और दुनिया में निराशा के माहौल के बावजूद भारत मजबूती से खड़े रहने की बात कही गई है।
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि खराब मौसम का अर्थव्यवस्था पर असर नहीं होगा। इसके अलावा मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में बेहतरी का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही सर्वे में कहा गया है कि सातवां वेतन आयोग कीमतों को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगा और इसका महंगाई पर मामूली असर पड़ेगा।
वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की निर्यात में बढ़ोतरी दर घटकर 17.6 प्रतिशत रह गई है और यह 217.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर आ गई है।
पेट्रोलियम तेल लुब्रिकेंट्स (पीओएल) का आयात कम होने का मुख्य कारण इस वर्ष अभी तक कुल आयात में कमी होना बताया गया है। इसके परिणामस्वरूप 2015-16 के दौरान (अप्रैल-जनवरी) व्यापार घाटा (जो वर्ष 2014-15 की इसी अवधि के दौरान 119.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा था) घटकर 106.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है।
आर्थिक समीक्षा 2015-16 में प्रस्तावित वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) को आधुनिक वैश्विक कर इतिहास में सुधार का असाधारण उपाय बताया गया है। समीक्षा में कहा गया है कि अनुमानित 2 से 2.5 मिलियन उत्पाद शुल्क और सेवा कर देने वालों को प्रभावित करने वाले जीएसटी से भारतीय कर प्रणाली में नाटकीय बदलाव आएगा।
21वीं सदी के लिए राजकोषीय क्षमता का खाका रखते हुए समीक्षा में निजी करदाताओं के आधार को बढ़ाने के लिए कहा गया है। इसमें कहा गया है कि 1980 के मध्य के बाद से अधिक संख्या में कर चुकाए जाने के बावजूद करीबन 85 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कर दायरे से बाहर है।