
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 45 डॉलर प्रति बैरल से भी कम होने की वजह से पेट्रोल और डीजल के दामों में 2 रुपए की कमी हो सकती है। नई कीमतें बृहस्पतिवार से लागू किए जाने की संभावना है। इससे पहले दिसंबर में इनके दामों 2 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई थी। कच्चे तेल की कीमतों में बीते साल जून से गिरावट का सिलसिला जारी है।
कीमतों में कमी का फायदा केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को दिल्ली विधानसभा चुनाव में हो सकता है। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा के लिए 7 फरवरी को वोटिंग होनी है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियां कीमतें कम करने के पक्ष में नहीं हैं। वे पिछले घाटे की भरपाई कीमतें कम नहीं कर करना चाहतीं हैं।
सरकारी व इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनिंग कंपनी इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आईओसी) को पुरानी इनवेंटरी पर करीब 12,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। भारतीय ऑइल मार्केटिंग कंपनियां एडवांस में कच्चे तेल खरीदती हैं और 30-40 दिन बाद उसे प्रोसेस करने के बाद बेचती हैं। कई बार इस दौरान कच्चे तेल के दाम में 20 फीसद तक की गिरावट देखी गई है।
सरकारी सूत्र ने बताया, 'कैबिनेट ने पेट्रोल-डीजल कीमतों को नियंत्रणमुक्त कर दिया है। अब सरकार इनके दाम तय नहीं करती। नियंत्रणमुक्त का मतलब यह है कि कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम में गिरावट का फायदा उपभोक्ताओं को देंगी। अगर कंपनियां गुटबंदी करके दाम नहीं घटाती हैं तो सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ा सकती है। केंद्र ने पहले भी ऐसा किया है।'
सरकार ने 1 जनवरी को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 2 रुपए लीटर की बढ़ोतरी की थी। उस समय भी ऑइल मार्केटिंग कंपनियों ने इनवेंटरी लॉस की भरपाई के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं किए थे। नवंबर 2014 के बाद सरकार एक्साइज ड्यूटी में तीन बार बढ़ोतरी कर चुकी है। इस तरह से सरकारी खजाने में काफी पैसा आया है।