
एजेंसी, मुंबई। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति का एलान कर दिया। उन्होंने बताया कि एमपीसी की बैठक (RBI MPC Meeting) में एक बार फिर रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती (Repo Rate Cut) का फैसला लिया गया है। इससे आम आदमी को सस्ते लोन के रूप में राहत मिलेगी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को तत्काल प्रभाव से 25 आधार अंकों से घटाकर 6% करने का फैसला किया है।
इससे पहले फरवरी में एमपीसी ने रेपो दर को 25 आधार अंकों से घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया था। तब यह मई 2020 के बाद पहली कटौती और ढाई साल के बाद पहला संशोधन था।
#WATCH | Mumbai | RBI Governor Sanjay Malhotra says, " The MPC (Monetary Policy Committee) voted unanimously to reduce the policy repo rate by 25 basis points to 6 % per cent with immediate effect."
(Source: RBI) pic.twitter.com/rRVCJiTy0H
— ANI (@ANI) April 9, 2025
मौद्रिक नीति के ऐलान से पहले एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई थी कि आरबीआई रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है, जिससे यह छह प्रतिशत हो जाएगी।
रिपोर्ट में आगे लिखा गया था, हमारा मानना है कि आरबीआई अपने विकास और मुद्रास्फीति के पूर्वानुमानों को कम कर सकता है। अप्रैल में कटौती के बाद हमें जून और अगस्त की बैठक में भी 25-25 आधार अंकों की और कटौती की उम्मीद है। इससे रेपो दर 5.5 प्रतिशत हो जाएगी और यह हमारा तटस्थ अनुमान है।
गोल्डमैन सैक्स को भी रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद थी। रियल एस्टेट डेवलपर संजीवनी ग्रुप के चेयरमैन और संस्थापक उमेश गौड़ा एचए ने कहा था कि वैश्विक विकास पर ट्रंप टैरिफ का प्रभाव महसूस किया जाएगा, क्योंकि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार धीमा हो रहा है, जिससे वैश्विक विकास प्रभावित हो रहा है।
गौड़ा ने कहा था, ‘चूंकि भारत की मुद्रास्फीति में गिरावट आ रही है, इसलिए आरबीआई को निवेश को बढ़ावा देने के लिए दरों में 50 आधार अंकों की कटौती करनी चाहिए ताकि व्यवसाय पूंजीगत व्यय में निवेश कर सकें और वैश्विक मांग को पूरा कर सकें। घरेलू मोर्चे पर, दरों में कमी से सभी क्षेत्रों में उपभोक्ता मांग बढ़ेगी और वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में मदद मिलेगी।’
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‘‘आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइन्ट्स की कमी का फैसला हमारी उम्मीदों के अनुरूप है यह दुनिया भर में कारोबारों के तनाव के बीच आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। मुझे उम्मीद है कि इससे होम लोन सस्ते होंगे और हाउसिंग मार्केट पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि मौजूदा उपभोक्ताओं को तो फायदा होगा ही, साथ ही उपभोक्ता भी प्रॉपर्टी में निवेश के बारे में सोचेंगे।
इसके अलावा लोन सस्ता होने से रियल एस्टेट सेक्टर में मांग बढ़ेगी, जिससे डेवलपर्स और घर के खरीददारों दोनों को लाभ होगा। अतुल मोंगा- सीईओ एवं सह-संस्थापक, बेसिक होम के अनुसार हालांकि उपभोक्ताओं को इसका क्या फायदा मिलता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि बैंक कितनी जल्दी रेट में कमी का फायदा अपने उपभोक्ताओं को देते हैं।
ऐसे में बैंकों के लिए ज़रूरी है कि वे जल्द से जल्द यह फायदा उपभोक्ताओं को दें ताकि उन्हें रेट में कमी का लाभ मिल सके। मैक्रोइकोनोमिक नज़रिए से देखें तो आरबीआई का यह फैसला डोमेस्टिक विकास को गति प्रदान करेगा। इन्फ्लेशन और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए इस तरह के फैसले भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इससे ऐसे समय में निवेश और खपत दोनों बढ़ेंगे, जब दुनिया भर में कारोबारों में उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई है।’’