
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : सरगुजा संभाग में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की 15 वर्षीय किशोरी की प्रसव के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। किशोरी ने घर पर ही एक बेटे को जन्म दिया था। प्रसव के बाद हालत बिगड़ने पर स्वजन उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लेकर आए थे, जहां पांच नवंबर को उसने दम तोड़ दिया। मृतका कोरवा किशोरी लिव इन में रहती थी।
जानकारी के अनुसार मृत किशोरी जशपुर जिले के सन्ना क्षेत्र की रहने वाली थी। कुछ महीने पहले वह बगीचा क्षेत्र के अकईकोना गिद्धा निवासी छोटू नामक युवक के साथ काम करने के लिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में गई थी। इसी दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गया और किशोरी गर्भवती हो गई। जानकारी मिलने पर युवक उसे अपने घर ले आया था। सामाजिक रूप से दोनों का विवाह नहीं हुआ था लेकिन दोनों लिव इन में रहते थे।
सोमवार को युवक के घर पर ही किशोरी का प्रसव हुआ, जहां उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद किशोरी की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। स्वजन उसे तीन नवंबर को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा था। तमाम प्रयासों के बावजूद पांच नवंबर को उसकी मौत हो गई।
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किशोरी की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है। वहीं घर पर जन्मे नवजात के स्वास्थ्य और देखभाल को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
इस घटना ने एक बार फिर कम उम्र में गर्भावस्था के खतरे, घर पर प्रसव के जोखिम और संस्थागत प्रसव की आवश्यकता को सामने ला दिया है। विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्र में किशोरियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता को लेकर प्रशासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर भी सवाल उठ रहे हैं।