
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। एक मां की ममता और दर्द एंबुलेंस के स्ट्रेचर पर लेटकर थाने के दरवाजे तक पहुंच गई। 25 जून को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई गांधीनगर निवासी रिंकी कुमारी रविवार को अस्पताल से एंबुलेंस से सीधे गांधीनगर थाने पहुंच गईं।
एंबुलेंस पर लेटकर स्वजन के साथ पहुंची महिला की आंखों में बेबसी और जुबां पर एक ही सवाल था, "मैं जीवनभर के लिए अपाहिज हो गई हूं, मेरा इलाज कौन कराएगा? मेरी बच्ची का क्या होगा? परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा?" गांधीनगर थाना प्रभारी प्रवीण द्विवेदी खुद एंबुलेंस के दरवाजे तक पहुंचे। उन्होंने महिला से आत्मीयता से बात कर दुर्घटनाओं में बीमा राशि की आर्थिक सहायता की प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने आश्वस्त किया कि पुलिस की ओर से कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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गांधीनगर निवासी रिंकी कुमारी ने बताया कि 25 जून को वह अपनी बेटी का स्कूल में एडमिशन कराने के लिए बनारस रोड स्थित अंबिका मिशन स्कूल गई थीं। दाखिले की जानकारी लेकर जब वह बाजार की ओर लौट रही थीं, तभी गांधीनगर क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार ने पहले सड़क किनारे खड़ी बाइक को टक्कर मारी और फिर उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
हादसा इतना भयावह था कि वह काफी दूर तक घिसटती चली गईं। इससे आसपास के लोगों में चीख-पुकार मच गई। पीड़िता का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद कार चालक गाड़ी से उतरा और अपनी गलती मानते हुए इलाज कराने का भरोसा दिया। वह रिंकी को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचा भी, लेकिन वहां से मौका पाकर फरार हो गया।

रिंकी ने बताया कि मुझे लगा था कि वह इंसानियत दिखाएगा, पर उसने मुझे तड़पता छोड़ दिया। हादसे में रिंकी की कमर और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। डॉक्टरों ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण उनके सामान्य रूप से चल पाने की उम्मीद कम है।
एंबुलेंस में लेटे-लेटे ही रिंकी ने थाने में अपनी व्यथा सुनाई कि, "मैं घर चलाती थी, बच्ची को पढ़ा रही थी, अब बिस्तर से उठ भी नहीं पाती।" उनका कहना है कि एफआईआर तो दर्ज हो गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोपित खुला घूम रहा है और वह दर्द से तड़प रही हैं। उनकी मांग है कि दुर्घटना कारित करने वाला चालक इलाज की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करे और उचित मुआवजा दे।
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गंभीर हालत को देखते हुए रिंकी कुमारी को अंबिकापुर से रायपुर रेफर कर दिया गया है, लेकिन महिला अभी भी अंबिकापुर के निजी अस्पताल में ही भर्ती है। परिचित उनकी मदद कर रहे हैं। गांधीनगर थाना प्रभारी प्रवीण द्विवेदी ने एंबुलेंस के पास पहुंचकर गंभीरता से उनकी सारी बातें सुनीं।
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उन्होंने बताया कि महिला की शिकायत पर पहले से ही प्राथमिकी दर्ज है और पुलिस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर रही है। थाना प्रभारी ने रिंकी को ऐसे मामलों में मिलने वाली बीमा राशि की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने समझाया कि मोटरयान दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) से कैसे राहत मिल सकती है, कौन से दस्तावेज जरूरी हैं और क्लेम की प्रक्रिया क्या है।