
नईदुनिया प्रतिनिधि अंबिकापुर: जिला मुख्यालय सहित सीतापुर में आयोजित नेशनल लोक अदालत में एक अहम मामले का निराकरण हुआ। हाइवा से उछले पत्थर से घायल युवक की मौत के मामले में बीमा कंपनी और पक्षकारों के बीच राजीनामा होने पर मृतक के स्वजन को 22 लाख 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में दिलाए गए।
राष्ट्र विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देश पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।अदालत के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय और सीतापुर न्यायालय में लगभग तीन हजार से अधिक लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया। राजस्व न्यायालयों में 22 सौ से अधिक प्रकरणों का निराकरण हुआ।
किशोर न्याय बोर्ड के चार और परिवार न्यायालय के 13 प्रकरणों का आपसी राजीनामा के आधार पर निराकरण किया गया। साथ ही प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निराकरण किया गया।लोक अदालत में निराकृत महत्वपूर्ण प्रकरणों में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश सुमित कुमार सोनी के खंडपीठ क्रमांक चार के समक्ष एक प्रकरण का निराकरण हुआ।
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नौ जून 2024 को ग्राम बरियों बस स्टैंड के पास दोपहर तीन बजे हाइवा से सड़क का पत्थर उछलकर सूरज केशरी के माथे की बाईं ओर कनपट्टी के पास लगा था। गहरी चोट लगने पर उसे अंबिकापुर अस्पताल और बाद में रायपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी।
मृतक की पत्नी, बच्चों और माता-पिता द्वारा महामाया एसोसिएट्स के प्रोपराइटर और एचडीएफसी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के विरुद्ध मोटर यान अधिनियम की धारा 166 के तहत क्षतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत किया गया था। लंबित रहने के दौरान अथक प्रयास के बाद बीमा कंपनी और पक्षकारों के बीच नेशनल लोक अदालत में राजीनामा हुआ और मृतक के स्वजन को 22 लाख 50 हजार रुपये प्रदान कर प्रकरण निराकृत किया गया।
23 साल पुराना चेक बाउंस केस भी खत्म
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के खंडपीठ क्रमांक छह के समक्ष 23 वर्षों से लंबित चेक बाउंस का प्रकरण भी निराकृत हुआ। स्व. दिलीप सिंह की ओर से उनकी पत्नी ने 29 दिसंबर 2023 को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत तीन लाख 49 हजार रुपये का परिवाद प्रस्तुत किया था। दोनों पक्षों ने बिना डर-दबाव के स्वेच्छा से राजीनामा किया।
इसी प्रकार व्यवहार न्यायाधीश सीतापुर पूजा मंडावी के खंडपीठ क्रमांक 11 के समक्ष वर्ष 2021 से लंबित प्रकरण में पक्षकारों ने पुराने विवाद भुलाकर राजीनामा किया, जिससे पांच वर्ष से लंबित प्रकरण का निराकरण होने के साथ आपसी विवाद भी समाप्त हो गया।
बच्चों के झगड़े से शुरू हुए विवाद का भी पटाक्षेप
व्यवहार न्यायाधीश उत्सव तिवारी के खंडपीठ क्रमांक 14 में बच्चों के विवाद से शुरू हुए झगड़े का निराकरण हुआ। एक ही गांव के दो परिवारों के बच्चों के आपसी विवाद के बाद दोनों परिवारों के सदस्यों के बीच गाली-गलौज, मारपीट और धमकी का विवाद हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया था।
लगभग पांच वर्ष से लंबित दोनों प्रकरणों में पक्षकारों ने आपसी मतभेद समाप्त कर समझौता कर लिया।व्यवहार न्यायाधीश कल्पना भगत के खंडपीठ में चेक बाउंस से संबंधित पांच वर्ष से लंबित परिवाद और मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी से संबंधित वर्ष 2021 से लंबित आपराधिक प्रकरण में भी पक्षकारों ने आपसी मतभेद भुलाकर राजीनामा कर लिया।