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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 21, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ambikapur News: करोड़ों की जमीन बेचने वाला ''बंसू'' नहीं आया कलेक्टर न्यायालय में

अंबिकापुर के बहुचर्चित जमीन घोटाले की गुरुवार को कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई हुई। दूसरी सुनवाई में भी कथित भूस्वामी बंसू लोहार उपस्थित नहीं हुआ। पहली ...और पढ़ें

By Yogeshwar SharmaEdited By: Yogeshwar Sharma
Publish Date: Thu, 21 Mar 2024 10:01:06 PM (IST)Updated Date: Thu, 21 Mar 2024 10:01:06 PM (IST)
Ambikapur News: करोड़ों की जमीन बेचने वाला ''बंसू'' नहीं आया कलेक्टर न्यायालय में

अंबिकापुर । अंबिकापुर के बहुचर्चित जमीन घोटाले की गुरुवार को कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई हुई। दूसरी सुनवाई में भी कथित भूस्वामी बंसू लोहार उपस्थित नहीं हुआ। पहली सुनवाई के दौरान भी कथित भूस्वामी बंसू लोहार पेशी पर उपस्थित नहीं हुआ था

। उनके पोते ने बंसू के रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी थी। अस्पताल का नाम उसने नहीं बताया था। इसी बीच बंसू लोहार के भूमाफियाओं के कब्जे में होने के आरोप से मामले में नया मोड़ आ गया था। सबसे बड़ी बात है कि बंसू लोहार ने तीन करोड़ 68 लाख से अधिक की जमीन कथित रूप से बेची है। लेकिन उसके जीवन में थोड़ा भी बदलाव नहीं आया है।


ग्राम परसा में एक कच्चा मकान तथा सेकंड हैंड चार पहिया के अलावा कुछ भी नहीं है। इतनी बड़ी राशि बैंक में जमा होने संबंधी कोई जानकारी स्वजन को भी नहीं है। ऐसे में गुरुवार को कलेक्टर न्यायालय में उसकी उपस्थिति पर सब की निगाह टिकी हुई थी। यदि बंसू उपस्थित होता तो कई सवालों के जबाब मिलते लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ।

उसकी ओर से पैरवी के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। कलेक्टर भोस्कर विलास ने सवाल किया कि - क्या आप कभी बंसू से मिले हो तो नहीं का जबाब आया। अधिवक्ता ने बंसू के पोते के आग्रह पर उनकी ओर से वकालतनामा प्रस्तुत करने की जानकारी दी। कलेक्टर ने इस पर जानना चाहा कि यह कैसे संभव है? उन्होंने अधिवक्ता से कहा कि - न्यायालय पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराएगा ऐसे में क्या बंसू को न्यायालय में उपस्थित किया जा सकता है ? इस पर भी सहमति नहीं दी गई बल्कि बंसू लोहार की ओर से प्रेषित अभ्यावेदन को अस्वीकार करने आग्रह कर दिया गया। दूसरी सुनवाई में भी भूस्वामी अथवा क्रेता उपस्थित नहीं हुए। बल्कि उनकी ओर से अधिवक्ताओं ने उपस्थिति देकर जरूरी दस्तावेज और जबाब प्रस्तुत किया। इस मामले को अब 28 मार्च 2024 को आदेश के लिए न्यायालय में नियत किया गया है। उस दिन सीधे आदेश सुनाया जाएगा।

भागे-भागे फिर रहे शासकीय सेवक

इस मामले में तत्कालीन नजूल अधिकारी, दो राजस्व निरीक्षक तथा एक लिपिक के विरुद्ध गैर जमानती धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। सत्र न्यायालय से उनका जमानत खारिज हो चुका है। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे भागे-भागे फिर रहे हैं। इन सभी ने सुनियोजित तरीके से शासकीय गोचर मद की चार एकड़ 22 डिसमिल जमीन को फर्जी तरीके से नामंतरित कर पैसे के लालच में खरीद बिक्री किया है। जिस बंसू लोहार का नाम इस मामले में आया है उसी के नाम से शहर और आसपास के इलाके में कई शासकीय जमीन का फर्जीवाड़ा किया गया है।उन सब प्रकरणों की फाइल भी धीरे-धीरे खुलने वाली है।

आयकर विभाग से भी शिकायत की तैयारी

करोड़ों के जमीन घोटाले के इस मामले में अब आयकर विभाग से भी शिकायत की तैयारी चल रही है। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने जमीन घोटाले की पूर्व में मय दस्तावेज कलेक्टर से शिकायत की थी। दस्तावेजों की जांच में इस प्रकरण में आयकर की भी चोरी किए जाने का शक है। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने बताया कि स्टांप जिनके नाम पर क्रय किया गया है उसमें रजिस्ट्री के समय शुल्क का भुगतान विक्रेता द्वारा किए जाने का उल्लेख है। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग से भी मामले की शिकायत की जा रही है।

लोहार,अगरिया,राम या विश्वकर्मा उलझन बरकरार

जिस बंसू लोहार को मोहरा बनाकर अंबिकापुर शहर की बेशकीमती जमीन का वारा - न्यारा किए जाने का आरोप लग रहा है उसके उपनाम को लेकर भी उलझन बरकरार है। जिस वर्ष उसके नाम कथित रूप से पट्टा जारी हुआ था उसमें बंसू लोहार था। कुछ दस्तावेजों में यह अगरिया तथा राम भी लिखा है। कालांतर में जमीन से जुड़े इस मामले के दस्तावेज में कहीं-कहीं उपनाम विश्वकर्मा भी लिखा गया है।