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7.50 लाख से घटकर 2.08 लाख रह गए कोल वर्कर, SECL में सिमटा स्थायी रोजगार, एटक ने उठाए सवाल

एसईसीएल और कोल इंडिया में स्थायी कामगारों की संख्या लगातार घट रही है। चालू वित्त वर्ष के पांच महीनों में एसईसीएल में 754 और कोल इंडिया में 3,450 कर्मच...और पढ़ें

By Anang Pal DixitEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 25 Sep 2026 04:20:18 PM (IST)Updated Date: Fri, 25 Sep 2026 04:20:18 PM (IST)
7.50 लाख से घटकर 2.08 लाख रह गए कोल वर्कर, SECL में सिमटा स्थायी रोजगार, एटक ने उठाए सवाल
फाइल फोटो

HighLights

  1. एसईसीएल में पांच माह में 754 कामगार घटे, ठेका श्रमिकों पर बढ़ रही निर्भरता।
  2. कोयला उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन स्थायी रोजगार का दायरा तेजी से सिमट रहा।
  3. एटक नेता अजय विश्वकर्मा ने कहा कि नियमित कामगारों की नियुक्ति नहीं होना गंभीर।

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: कोयला उत्पादन बढ़ाने की कवायद के बीच साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में स्थायी कामगारों की संख्या लगातार घट रही है। चालू वित्त वर्ष के महज पांच महीनों में एसईसीएल के श्रमबल में 754 कर्मचारियों की कमी आई है। वहीं कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों में इसी अवधि में 3450 स्थायी कर्मचारी कम हुए हैं।

एक ओर कोयला उत्पादन का लक्ष्य लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थायी कामगारों की संख्या घटने से उत्पादन में ठेका श्रमिकों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। इसका सीधा असर कोयलांचल में स्थायी रोजगार के अवसरों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कोल इंडिया की हाल ही में जारी अगस्त माह की श्रमबल सारांश रिपोर्ट के अनुसार एक सितंबर तक कंपनी में कुल 2,08,616 स्थायी कर्मचारी रह गए हैं। चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में यह संख्या 2,12,066 थी। इस तरह पांच माह में ही 3450 कर्मचारियों की कमी आई है। इनमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में सबसे अधिक 1045, एसईसीएल में 754 और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड में 620 कर्मचारियों की कमी दर्ज की गई है।


साल 1975 में कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के समय कोल इंडिया में करीब 7.50 लाख कर्मचारी थे। उस समय कंपनी का कोयला उत्पादन लगभग 79 मिलियन टन था। आज कोल इंडिया का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य बढ़कर 814.85 मिलियन टन हो गया है, लेकिन स्थायी श्रमबल घटकर करीब 2.08 लाख रह गया है। 17 सितंबर 2026 तक कोल इंडिया ने 297.07 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है।

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सेवानिवृत्ति के बाद नई भर्ती सीमित

स्थायी कामगारों की संख्या घटने की प्रमुख वजह लगातार हो रही सेवानिवृत्ति, मशीनीकरण, स्वचालन और नई नियुक्तियों का सीमित होना माना जा रहा है। वर्तमान में स्थायी नियुक्तियां मुख्य रूप से मृत्यु प्रकरण, अनुकंपा नियुक्ति और जमीन के बदले रोजगार जैसे मामलों तक सीमित रहने की बात सामने आ रही है। इसके विपरीत उत्पादन कार्यों में बाहरी कंपनियों के माध्यम से ठेका श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। श्रमिक संगठनों के अनुसार कोल इंडिया में ठेका श्रमिकों की संख्या करीब चार लाख तक पहुंच चुकी है।

स्थायी नौकरी के बजाय ठेका व्यवस्था

स्थायी और ठेका श्रमिकों के वेतन तथा सुविधाओं में भी बड़ा अंतर बताया जाता है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि समान प्रकृति का काम करने के बावजूद ठेका श्रमिकों को स्थायी कर्मचारियों की तुलना में काफी कम पारिश्रमिक मिलता है। इससे कंपनी की श्रम लागत कम हो सकती है, लेकिन स्थायी रोजगार के अवसर लगातार सीमित होते जा रहे हैं।

नई नियुक्तियां नहीं होना चिंता का विषय

एटक नेता अजय विश्वकर्मा का कहना है कि कोल इंडिया में नियमित कामगारों की नियुक्ति नहीं होने से कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है। फिलहाल मृत्यु प्रकरण, अनुकंपा और जमीन के बदले नौकरी जैसे मामलों में ही नियुक्तियां हो रही हैं। उनका कहना है कि उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रबंधन बाहरी कंपनियों पर अधिक निर्भर हो रहा है। इससे स्थायी रोजगार और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा का सवाल गंभीर बना हुआ है।