नईदुनिया प्रतिनिधि , अंबिकापुर : बलरामपुर जिले की बसंतपुर पुलिस ने फर्जी जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का राजफाश किया है। मामले में एक कंप्यूटर दुकान संचालक को गिरफ्तार कर उसके पास से चार-पांच फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बरामद किए गए हैं। आरोपित द्वारा अभी तक लगभग 300 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बना दिए जाने की स्वीकारोक्ति भी कर ली गई है। ये सारे प्रमाण पत्र वास्तविक डिजिटल हस्ताक्षर व सील से बनाए गए थे। मामले में पुलिस ने आरोपित को न्यायालय के निर्देश पर जेल भेज दिया है। अभी प्रकरण की जांच चल रही है। जांच में कुछ और लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना हैं।
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से फर्जी जन्म मृत्यु, प्रमाण पत्र बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही थी लेकिन तथ्यात्मक दस्तावेज सामने नहीं आ पाने के कारण स्वास्थ्य और पुलिस विभाग जांच व कार्रवाई नहीं कर पा रहा था। इस बीच वाड्रफनगर के विकासखंड चिकित्सा अधिकारी के पास एक जन्म प्रमाण पत्र जांच के लिए पहुंचा।प्रथम दृष्टया जन्म प्रमाण पत्र के फर्जी होने की आशंका हुई।जब विभागीय दस्तावेजों से इसका मिलान किया गया तो पता चला कि उक्त नाम का कोई प्रकरण आया ही नहीं था। इस पर बीएमओ ने वस्तु स्थिति से पुलिस को अवगत कराया बसंतपुर थाना प्रभारी कुमार चंदन सिंह ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति से पूछताछ करने पर उसने वाड्रफनगर स्थित सत्यम कुमार प्रजापति के कंप्यूटर दुकान से जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की जानकारी दी। इस आधार पर पुलिस ने सत्यम कुमार प्रजापति को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह डिजिटल सिग्नेचर और सील के माध्यम से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाया करता था। आरोपित ने अब तक बनाए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र की सूची भी पुलिस को सौंप दी हैं।पुलिस ने कुछ फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तथा कंप्यूटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जप्त किए हैं। आरोपित को धारा 420,467,468,471 के तहत कार्रवाई कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है।
ऐसा एप जिसमें प्रदेश भर के सीएमओ व बीएमओ का डिजिटल हस्ताक्षर व सील
बसंतपुर थाना प्रभारी कुमार चंदन सिंह ने बताया कि आरोपित द्वारा एप के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षर और सील का उपयोग नियमविरुद्ध तरीके से किया गया है। उन्होंने बताया कि इस एप में पूरे प्रदेश के मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी तथा विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर तथा सील उपलब्ध है।इस कारण वह प्रदेश में किसी भी स्थान के नाम पर फर्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में सफल हो जाता था।
पकड़ पाना आसान नहीं
बसंतपुर थाना प्रभारी कुमार चंदन सिंह ने बताया कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र एकदम असली जैसे प्रतीत हो रहे थे। इसमें ऐसी कोई कमी नहीं दिख रही थी जिससे इसके फर्जी होने का पता चले। आरोपित द्वारा एक हजार से लेकर अधिक राशि में यह फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाया जाता था।
इस कारण सामने आ गया फर्जीवाड़ा
जांच में पता चला कि जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्रों में एक डिजिटल हस्ताक्षर किया जाता है। इसके विपरीत खंड चिकित्सा अधिकारी वाड्रफनगर दो हस्ताक्षर करते थे। जब एक हस्ताक्षर वाला जन्म प्रमाणपत्र जांच के लिए आया तो गड़बड़ी उजागर हो गई और जांच में इस फर्जीवाड़े का राज खुल गया। इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने दस्तावेज भी खंगाले,उसमें भी संबंधित का नाम नहीं था।