
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : सरगुजा जिले में हुए दो अलग-अलग हत्या के मामलों में अदालत ने निर्णय सुनाया है। सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने दोनों घटनाओं के दोषियों को आजीवन कारावास और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर दोषियों को एक-एक वर्ष अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अपर लोक अभियोजक प्रकाशमणि त्रिपाठी ने अदालत के निर्णयों की जानकारी दी है।
पहला मामला सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम कुनमेरा का है। यहां के निवासी धरम सिंह (40) की मां की मृत्यु को एक वर्ष से अधिक समय हो गया था। सात मई 2026 को धरम सिंह शराब के नशे में घर पहुंचा। उसने अपने पिता रामबिलास से कहा कि मां को इस दुनिया से गए एक साल से ज्यादा हो गया है, पैसे नहीं होने के कारण आपने अभी तक उसका दशकर्म नहीं किया है, अब जमीन बेचकर मां का दशकर्म कर देते हैं।
इस बात पर पिता रामबिलास नाराज हो गया और उसने जमीन बेचने से साफ मना कर दिया। इसी बात को लेकर पिता-पुत्र में विवाद शुरू हो गया। विवाद के दौरान आवेश में आकर बेटे धरम सिंह ने पिता की हाथ-मुक्के से पिटाई शुरू कर दी और गुस्से में पास में रखे पेचकस से पिता के गले पर वार कर दिया। इस हमले में पिता रामबिलास की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना पर सीतापुर पुलिस ने आरोपी बेटे धरम सिंह को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया था। प्रकरण की जांच के बाद पुलिस ने चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया। सभी तथ्यों और साक्ष्यों की सुनवाई के बाद अदालत ने धरम सिंह को पिता की हत्या का दोषी पाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
दूसरा मामला अंबिकापुर से लगे गांधीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम डिगमा का है। यहां चार अक्टूबर 2025 को शीला सोनहा नामक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में घर पर मौत हो गई थी। शुरू में स्वजन ने अत्यधिक शराब सेवन से मौत होने की बात कही थी।लेकिन पंचनामा के दौरान पुलिस को मृतका के गले पर निशान मिले।
शक के आधार पर पुलिस ने उसके पति उमाशंकर सोनहा (33) को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उमाशंकर ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि घटना वाले दिन उसकी पत्नी शीला छोटे बच्चे को पीट रही थी। जब उसने कारण पूछा तो दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और आवेश में आकर उसने पत्नी का गला दबाकर हत्या कर दी।
गांधीनगर पुलिस ने पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और जांच के बाद चालान अदालत में पेश किया था। अदालत ने पत्नी की हत्या के दोषी पति उमाशंकर सोनी को आजीवन कारावास और 2000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने मृतका के उत्तराधिकारियों को शासन की पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने की भी अनुशंसा की है।