अंबिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग पूरी तरह ठप, प्रतापपुर में हाथी ने ली व्यक्ति की जान, शव सड़क पर रखकर उग्र प्रदर्शन
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम सरहरी में हाथी के हमले से ग्राम सिंघरा निवासी रामलाल (50) की मौत हो गई। घटना के विरोध में आक्रोशित ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह अंबिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग पर पोड़ी मोड़ के पास शव रखकर चक्काजाम कर दिया।
Publish Date: Thu, 20 Aug 2026 02:05:41 PM (IST)Updated Date: Thu, 20 Aug 2026 02:05:41 PM (IST)
हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत, मुआवजा व नौकरी की मांग को लेकर बनारस मार्ग जामHighLights
- प्रतापपुर में हाथी ने ग्रामीण को कुचला, मौके पर मौत।
- आक्रोशित ग्रामीणों ने अंबिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग किया जाम।
- 20 लाख मुआवजा व दो नौकरियों की मांग पर अड़े।
नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर: सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में हाथी के हमले से एक ग्रामीण की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह अंबिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग पर पोड़ी मोड़ के पास सड़कजाम कर दिया। सुबह नौ बजे से शुरू जाम के कारण मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई है।
जानकारी के अनुसार ग्राम सिंघरा निवासी रामलाल (50) बुधवार को मोटरसाइकिल से ग्राम सरहरी गया थे। सरहरी
से घर वापस लौटते समय अचानक हाथी से सामना हो गया। हाथी ने रामलाल को कुचलकर मार डाला और मोटरसाइकिल को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद वन विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची तो गांव वालों ने नाराजगी जताई। किसी तरह मामला शांत हुआ था।
गुरुवार सुबह ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर अंबिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मृतक के आश्रितों को 20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए और परिवार के दो सदस्यों को वन विभाग में स्थाई नौकरी दी जाए।
दोनों पक्षों के बीच लंबी चर्चा के बाद प्रशासन ने शासन द्वारा निर्धारित छह लाख रुपये मुआवजे की त्वरित प्रक्रिया शुरू करने और परिवार के दो सदस्यों को दैनिक वेतन भोगी के रूप में वन विभाग में काम देने पर सहमति जताई। साथ ही पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया गया कि शासन द्वारा निर्धारित मुआवजे से अधिक राशि के लिए पत्राचार किया जाएगा।
लेकिन ग्रामीण इस प्रस्ताव को मानने को तैयार नहीं हैं। समाचार लिखे जाने तक ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी था।जाम के कारण मालवाहक वाहनों के साथ यात्री बसें भी फंस गई हैं। यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में हाथियों का सर्वाधिक विचरण होता है। हाथियों के अनुकूल वातावरण होने के कारण वर्षभर इस इलाके में हाथी रहते हैं।